जैविक कीटनाशी एवं जैविक उत्पाद के नमूनों की होगी गहण जाँच नमूनों की जाँच के लिए सरकार द्वारा किया गया राशि का विशेष प्रावधान -डाॅ॰ प्रेम कुमार

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पटना- कृषि मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने कहा कि जैव उपादान विश्लेषण योजना के अंतर्गत जैविक कीटनाशी एवं जैविक उत्पाद के नमूने की गुणवत्ता विश्लेषण कार्यक्रम का वित्तीय वर्ष 2018-19 में 51,60,000 रूपये की लागत पर राज्य मद से योजना के कार्यान्वयन की स्वीकृति प्रदान की गई है।

मंत्री ने कहा कि जैविक कोरिडोर एवं जैविक खेती प्रोत्साहन योजना विभाग की एक महती योजना है, जिसमें रासायनिक खाद एवं कीटनाशी का व्यवहार नहीं किया जाता है तथा किसी तरह के रासायनिक अवयव का उपयोग भी नहीं किया जाता है। इसमें वर्मी कम्पोस्ट सहित अनेक अवयव समाहित है। सब्जी एवं फसलों में कीट तथा व्याधि के प्रबन्धन हेतु कृषकों द्वारा जैव कीटनाशी एवं जैविक उत्पाद का प्रयोग किया जाता है।

डाॅ॰ कुमार ने कहा कि कुल 21 तरह के जैव कीटनाशी एवं वानस्पतिक एक्सट्रेक्ट सी॰आई॰बी॰ (आर॰सी॰) में निबंधित है। इनकी गुणवत्ता की जाँच (विश्लेषण) भारत सरकार के 7 नोटिफाईड प्रयोगशाला के साथ-साथ एन॰आई॰पी॰एच॰एम॰ हैदराबाद में होता है, जिसका विश्लेषण शुल्क 3000 से 5000 रूपये प्रति नमूना है। जैव उत्पाद जो सी॰आई॰बी॰ (आर॰सी॰) में निबंधित नहीं है, की काफी मात्रा में राज्य में बिक्री होती है तथा कृषकों के द्वारा जैव उत्पाद का प्रयोग काफी मात्रा में किया जाता है। सी॰आई॰बी॰ (आर॰सी॰) में निबंधित नहीं होने के कारण कीटनाशी अधिनियम एवं नियमावली के तहत् इस तरह के उत्पाद पर कीटनाशी एक्ट का प्रवत्र्तन का प्रावधान नहीं है या इसके परिधि में नहीं आता है।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार के द्वारा जैव उत्पाद में रासायनिक अणु होने की संभावना व्यक्त की जाती रही है, जिसके कारण इस तरह के जैव उत्पाद के नमूनों का जाँच आवश्यक है। इस तरह के जैव उत्पाद यदि जैविक कोरिडोर का जैविक खेती प्रोत्साहन योजना में किसानों द्वारा उपयोग किया जाता है, तो सब्जी एवं अन्य जैविक उत्पाद में रासायनिक अवशेष होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है, इसलिए बिहार सरकार द्वारा इस तरह के जैव उत्पाद नमूनों की जाँच राष्ट्रीय वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद से विश्लेषित कराने हेतु राशि कर्णांकित की गई है।