जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरा-शक्ति बनी रहेगी तथा पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा – डाॅ॰ प्रेम कुमार

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पटना – बिहार के कृषि विभाग मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य के प्रत्येक जिला में एक जैविक ग्राम की स्थापना की जायेगी। रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की संरचना भी खराब हो रही है। मिट्टी की उर्वरा-शक्ति को अक्षुण्ण बनाये रखने एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के अन्तर्गत विभाग द्वारा वर्ष 2017-18 में पायलट प्रोग्राम के रूप में प्रत्येक जिले में एक गाँव का चयन कर जैविक ग्राम बनाने की योजना कार्यान्वित की गई जिसमें अधिक-से-अधिक किसानों को वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन करने हेतु इकाई पर अनुदान का प्रावधान किया गया। वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से खेती लागत में कमी आयेगी तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य की भी पूर्ति हो सकेगी।

इस कार्यक्रम के माध्यम से रासायनिक खादों पर से निर्भरता कम करने के साथ-साथ वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन करने हेतु किसानों को प्रोत्साहित किया जा सकेगा। इस योजनान्तर्गत किसानों को पक्का वर्मी कम्पोस्ट इकाई के निर्माण करने पर लागत मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकतम 5,000 रू0 प्रति इकाई अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2018-19 में इस कार्यक्रम के अन्तर्गत गत वर्ष में चयनित गाँवों के अतिरिक्त एक और गाँव का चयन कर सभी ईच्छुक लोगों को वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन हेतु इकाई निर्माण कराया जायेगा, जिससे अन्य किसान भी योजना के प्रति जागरूक हो सके। साथ ही वर्ष 2017-18 में चयनित गाँव के ईच्छुक किसान जो योजना का लाभ नहीं ले सके हैं उन्हें भी इस वर्ष की योजना से लाभ दिया जायेगा। साथ ही जैविक खेती प्रोत्साहन योजना के अन्य कार्यक्रमों से भी चयनित गाँवों के ईच्छुक किसानों को लाभान्वित किया जायेगा।

मंत्री ने कहा कि जैविक खेती हमारी सरकार की प्राथमिकता हैं। कृषि विभाग द्वारा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएॅं चलाई जा रही है। जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरा-शक्ति बनी रहेगी तथा पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा। कृषि रोड मैप के अधीन राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक व्यवहार से मिट्टी की उर्वरा-शक्ति कम हुआ है। इसका प्रतिकूल असर मानव जीवन पर भी पड़ रहा है। रासायनिक खाद पर अत्यधिक निर्भरता से खेती की लागत भी बढ़ा है। छोटे-छोटे किसान इससे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इन परिस्थितियों से राज्य को बचाने के लिए राज्य सरकार जैविक खेती पर विशेष बल दे रही है।