झूठ बोलने का कॉपी राइट तो लालू परिवार ने लिया है – संजय सिंह

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पटना- जेडी(यू) मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद संजय सिंह ने कहा कि तेजस्वी यादव झूठ बोलने का कॉपी राइट तो लालू परिवार ने लिया हुआ है। सफेद झूठ बोलने की आदत और व्यवहार तो आरजेडी की संस्कृति रही है। लालू परिवार में झूठ बोलना एक व्यवहार बना हुआ है। इसका सीधा उदाहरण लालू यादव की संपत्ति से जुड़ा है। 15000 करोड़ रुपए की संपत्ति लालू यादव और उनके परिवार ने कैसे अर्जित की, यह अभी तक किसी ने नहीं बताया।

अब इससे बड़ा झूठ क्या हो सकता है की अकूत संपत्ति के मालिक बन बैठे हैं और यह भी नहीं बताते कि यह संपत्ति कहां से आई। तेजस्वी यादव जान लें कि नीतीश कुमार को झूठ बोलने की प्रवृति नहीं रही है और वो झूठ और झूठ बोलने वालों से नफरत करते है । सिर्फ राजनीतिक परिवार में जन्म लेना ही राजनेता बनने का लाइसेंस नहीं होता है। नेता बनने के लिए समाज के हर कसौटी पर खरा उतरना पड़ता है । समाज के हर बात को समझना और जानना होता है। लेकिन लालू यादव के दोनों सुपुत्र सिर्फ लालू यादव के घर जन्म लेने के बाद राजनीति को अपना पुश्तैनी मानने लगे है। जबकि वो भ्रम में हैं । ना तो तेजस्वी, तेजप्रताप के पास राजनीति का कोई अनुभव है और ना ही उनके पास राजनीति करने की नैतिकता।

आज तेजस्वी यादव शिष्टाचार की बात करते हैं। नैतिकता की बात करते हैं। उनका शिष्टाचार और नैतिकता उस वक्त कहां गया था, जब उनके भाई तेजप्रताप यादव ने मुख्यमंत्री को अपशब्द कहे थे और प्रधानमंत्री को गाली दी थी। पहले तेजस्वी यादव अपने घरे का तो शिष्टाचार देखें। उनके घर की भाषा, आरजेडी के नेताओं की भाषा और व्यवहार उनके पार्टी और घर के संस्कार को जगजाहिर कर देता है। अपने से वरिष्ठ नेताओं के साथ अनिष्ट व्यवहार करने वाले आज शिष्ट बन रहे हैं ।

तेजस्वी यादव माने लें कि नीतीश कुमार के बदौलत ही महागठबंधन को भारी मैंडेट मिला था। नीतीश कुमार ऑन डिमांड नेता है। नीतीश कुमार को महागठबंधन के नेता बनाने के लिए लालू यादव से लेकर मुलायम सिंह यादव तक ने उनकी चिरौरी की थी। नीतीश कुमार उनके पास नहीं गए थे। लालू यादव ने अपनी राजनीतिक नैया को डूबते हुए देखा तो उन्होंने महागठबंधन बनाने की कवायद शुरु की। इस महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस और जेडीयू को शामिल किया गया। फिर जब नेता चुनने की बारी आई तो नीतीश कुमार के सामने प्रस्ताव रखा गया कि वह महागठबंधन के नेता बने । उसके बाद नीतीश कुमार ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया था। नीतीश कुमार कभी नहीं कहने गए थे कि वह बिहार के सीएम बनना चाहते हैं। उन्होंने ने तो इस्तीफा दे दिया था। लेकिन लालू यादव और मुलायम सिंह यादव ने जबरदस्ती उनपर सीएम बनने का दबाव बनाया और पूरे बिहार में नीतीश कुमार के चेहरे को भुनाया।

Regards,