“तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा”- सुभाष चंद्र बोस

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सुप्रिया सिन्हा

पटना- स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता सुभाष चंद्र बोस का आज 121 वीं जयंती है। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 में ओड़िशा के कटक में हुआ था। उनके पिता जानकीनाथ बोस कटक के मशहूर वकील थे। सुभाष चंद्र बोस अपने 14 भाई-बहनों में 9वें स्थान पर थे।

बोस ने आईसीएस की नौकरी से इस्तीफा दे दी। सुभाष चंद्र बोस सिविल सर्विस छोड़ने के बाद 24 साल की उम्र में भारतीय कांग्रेस लीग से जुड़ गये। इन्होंने गाँधी जी के साथ असहयोग आंदोलन में भाग लिया और बहुत जल्द देश के युवा नेता बन गए। हालांकि कुछ समय बाद वे गांधी जी से अलग होकर अपना दल बनाए। जिसमें उन्होंने युवाओं को शामिल किया। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने जापान के सहयोग से आजाद हिन्द फौज का गठन किया। अपने फौज के साथ वे 1944 में बर्मा चले गए और वहीं उन्होंने यह नारा दिया- “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा”। उन्होंने “जय हिंद” और “दिल्ली चलो” का नारा भी बोस ने ही दिया जो बहुत प्रचलित है। 1934 में जब सुभाष चन्द्र बोस अपने इलाज के लिए ऑस्ट्रिया गए तब उनकी मुलाकात एमिली शेंकल से हुई और उन दोनों में प्रेम हो गया। 1942 में बाड गास्टिन नामक स्थान पर उन दोनों ने हिन्दू पद्धति से विवाह कर लिया। उनकी एक बेटी अनिता बोस है।

18 अगस्त 1945 को नेताजी सुभाषचंद्र हवाई जहाज से मंचूरिया की तरफ जा रहे थे। इस सफर के दौरान वे लापता हो गए। बताया जाता है कि उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उनकी मृत्यु की खबर रहस्य बनी हुई है। 2005 में ताइवान सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि 1945 में ताइवान की भूमि पर कोई हवाई जहाज दुर्घटनाग्रस्त हुआ ही नहीं था। भारत सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया। इस तरह उनके लापता होने की बात भारतीय इतिहास में सबसे बड़ा रहस्य बन गया है।

सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता बुलाने वाले पहले शख्स थे। बोस ने रंगून के रेडियो चैनल से महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए पहली बार “राष्ट्रपिता” कहा था।

उनके 121वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है।