थाने की जीप बन गई धकेल गाड़ी

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दिलीप कुमार

कैमूर – बिहार सरकार बढ़ते क्राइम को देखते हुए थाना और सिस्टम को हाईटेक बनाने की बातें करती है, लेकिन अपराधियों को पकड़ने के लिए थाने के पास मौजूद वाहन ढकेल गाड़ी बनकर रह गया है। यहां तक कि बिहार के डीजीपी ने भी कहा था कि हमारी पुलिस विदेशो से भी ज्यादा एक्टिव है, लेकिन सिस्टम का जरा हाल देखिए, एक्टिव पुलिस के पास कितनी एक्टिव वाहन है देखने से अंदाजा खुद लगाया जा सकता है। एसपी भी मानते हैं कैमूर जिले के थानों की कुछ गाड़ियां खटारा हो गई है लेकिन साहब भी क्या करें सिस्टम ही ऐसा है।

यह दिखने वाला पुलिस की जीप मोहनिया थाने की है। जिसे मोहनिया थाने से कहीं भी गस्ती पर या यात्रियों की धरपकड़ को जाने के पहले उसको धक्का देना पड़ता है उसके बाद जीप स्टार्ट होती है, और वह अपने ड्यूटी की तरफ निकलती है। जो गाड़ी खुद दूसरों के धक्का खा कर चले तो उस गाड़ी पर सवार होकर कैमूर जिले के दरोगा जी अपराधी को भला कैसे पकड़ सकते हैं।

सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि इतनी पुरानी जीप का आखिर मेंटेनेंस सरकार और प्रशासन क्यों नहीं कराता है, क्या ऐसे ही खटारा जीप में सवार होकर अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस जाएगी तो अपराधी उनके आने का इंतजार करेंगे, मोहनिया थाना के हौसले पर दम तोड़ती थाने की गस्ती गाड़ी।

कैमूर एसपी दिलनवाज अहमद ने बताया कि कुछ पुरानी गाड़ियां है जो खराब हो गई है जिसकी संख्या पूरे जिले में चार है जिसका मर मति करण के लिए भेजा जा रहा है और मुख्यालय से भी और गाड़ियों की मांग की गई है बहुत जल्द 14 या 15 गाड़ियां आने वाली है कि हम और पुलिस के वाहन भी अब हाईटेक हो जाएंगे।