दहेज में दूल्हे ने मांगी अपाची तो दुल्हन ने किया शादी से इनकार

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दरभंगा / संवाददाता-

दुल्हन बन अपनी आखों में हसीन सपने पाले निधि सुप्रिया अपने होने वाले पति रंजीत के नाम की मेहदी लगा बैठी थी, लेकिन अभी मेंहदी के रंग ठीक से खिला भी नहीं की निधि सुप्रिया के चेहरे के रंग उतर गए, सुप्रिया दुल्हन तो बनी पर वह रंजीत की पत्नी नहीं बन पाई । ठीक शादी के दिन ऐसा कुछ हुआ कि सुप्रिया जिसके इंतज़ार में पलके बिछाए बैठी थी, उससे खुद ही शादी करने से इंकार कर दिया । दरअसल, बिहार के दरभंगा ज़िला अंतर्गत आर.एस.टैंक मुहल्ले की रहने वाली निधि सुप्रिया की शादी मधुबनी के रहने वाले रंजीत के साथ तय हुई।

रंजीत अपने आपको प्रखंड कार्यालय में सरकारी नौकरी में काम करने की भी बात कही थी, सुप्रिया भी दरभंगा के कृषि विभाग में क्लर्क की पोस्ट पर नौकरी करती है। शादी की बात पूरी तरह तय हो गई और बीती रात यानी 28 जून को शादी होनी थी, इससे पहले शादी के कार्ड भी छप गए, रिश्तेदार भी पहुंच गए, घर मकान दरवाजा सज चूका था , बरात के लिए अच्छे पकवान बन रहे थे, घर में मंगल गीत गाये जा रहे थे। तभी बारात निकलने से ठीक पहले लड़के के परिवार वालों ने फोन पर न सिर्फ लड़की वालों से एक अपाची मोटरसाइकल की मांग कर दी, बल्कि अपने छोटे भाई को अपाची गाड़ी लेने के लिए दुल्हन वालों के घर भी भेज दिया, दुल्हन के घरवालों को कुछ शक हुआ, तब पूछ-ताछ में खुलासा हुआ कि लड़का ना तो पढ़ा लिखा और न ही सरकारी नौकड़ी में है। यह सुन दुल्हन के होश उड़ गए। तत्काल दुल्हन ने रंजीत से शादी न करने की मन बना ली, इधर दूल्हा रंजीत पूरी तरह सज़ संवरकर बारात के साथ रात में दुल्हन के दरवाजे भी पहुंचा, जहां दुल्हन से न सिर्फ रंजीत से शादी करने से इनकार कर दी, बल्कि दुल्हन के परिवार वाले दूल्हे ओर उसके पिता को बंधक बना कर एक कमरे में बंद कर दिया और शादी में खर्च के पैसे की मांग पर अड़ गए। अब बेचारा दूल्हा उल्टा फंसता दाव देख बिना अपाची गाड़ी के ही शादी करने को तैयार हो गया, पर दुल्हन किसी भी शर्त पर इससे शादी करने को राजी नहीं है।

दुल्हन अब इस बात पर अड़ी है कि उसे न सिर्फ शादी में हुए खर्च के पैसे लौटाए जाए, बल्कि उसे हर्जाना भी दिया जाए। इधर बंधक बना दुल्हल और उसका पिता नित्यानंद लाल भी मानते हैं कि शादी में खर्च के नाम पर एक लाख रुपये लिए थे। दूल्हा के परिवार वाले एक लाख रुपये लौटाने के लिए अब इंतज़ाम में लग गए हैं। ताकि पैसा देकर किसी तरह यहां बने बंधक से आज़ादी पा सके । हालांकि लड़का अपने आपको इसके लिए दोषी नहीं मानता बल्कि शादी तय कराने वाले अगुआ पर ही दोष मढ़ रहा है । दहेज़ लोभियों के खिलाफ ऐसे सलूक एक उदाहरण है । समाज के लिए जो पैसे के खातिर अपने बेटे का रिश्ता के बदले सौदा तय करते हैं। अब देखना है कि आखिर इन दहेज़ लोभियों को बंधक से मुक्ति पाने में और कितना वक्त लगता है ।