दिमाग है या स्कैनर !

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बेतिया- दिमाग है या स्कैनर हम ऐसा इसलिय कहते है की क्या कोई इंसान आंखो पर काला पट्टी बांधकर हाथों में डेबिट कार्ड, आधार कार्ड या कोई भी कागज पर लिखा हुआ शब्द और कागज पर चढा हुआ रंग को सिर्फ वो सिर्फ हाथों से छुकर और माथे से लगाकर बता सकती है की डेबिट कार्ड का नंबर क्या है और आधार कार्ड पर नाम क्या अंकित है ?

तो यकीन मानिऐ और अपनी खुली आंखो से ये सब देखिए जो यह महज 7 महीने की तालिम से mid brain activation की पद्धती के तहत आंखो पर काला पट्टी बांधकर 15 साल की उम्र वाली लड़की जो अपने जीवन में जिलाधिकारी बनना चाहती है वो बेधड़क सब कुछ पढ़ लेती है। जैसे कोई एटीएम कार्ड को एटीएम मशीन में डालते ही मशीन एटीएम कार्ड को पूरा पढ़ लेता है और जैसे कोई कागज हम स्कैनर में डालते है तो हमे पूरी जानकारी दे देता है ठीक उसी तरह यह दरभंगा बिहार की रहने वाली 15 साल की लड़की डेबिट कार्ड, आधार कार्ड को पहले छूती है फिर माथे से लगाती है और कार्ड पर अंकित नंबरो को पढ़ने लगती है। ये सब कुछ कैमरे के सामने और वो भी आंखो पर काला पट्टी बांधकर करती है।

मोनिका गुप्ता अपने परिवार में पांच भाई- बहनो में चौथी नंबर पर है, जो दरभंगा के सीएम साइंस कॉलेज की 11 वी में पढ़ने वाली छात्रा है जिनका सर से पिता का साया छिन चुका है एक भाई प्राइवेट शिक्षक है, जिसके बल पर पूरा परिवार चलता है वो बताती है की मै जो ट्रेनिंग ली हूँ। उस पद्धती के द्वारा जब मै किसी चीज को हाथो में लेकर छूती हूँ तो माईंड में परमिशन जाता है और कलरफूल इमेज बन जाता है जिससे हम बता पाते है की क्या लिखा हुआ है।

दिप प्रज्वलित कर और इस कारनामे को देखकर बिहार में बहुरानी के नाम से जाने वाली अपर्णा सिंह जो बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग में 6 साल तक सदस्या रही है और फिलहाल बिहार सरकार में खेल प्रभारी है, जिंनका जीवन सिर्फ व सिर्फ उन बच्चो के लिए है जिनका कोई नहीं है। जो चाहती है की ऐसी शिक्षा बिहार के हर स्कूल में तुरंत लागू हो जिसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी से आग्रह भी करेंगी।