दिव्यांगजनों की यूनीक डिस्एबिलिटी आईडेन्टिटी परियोजना पर एक दिवसीय प्रशिक्षण

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पटना दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर महत्वपूर्ण कदम उठाए जाते रहे हैं। इस दिशा में एक और कदम उठाया जा रहा है, यूनीक डिस्एबिलिटी आईडेन्टिटी (यूडीआईडी) परियोजना के रुप में। इस परियोजना की शुरुआत दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय-भारत सरकार द्वारा की जाएगी जिसकी तैयारी के रुप में आज यहां नियोजन भवन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का आयोजन दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, भारत सरकार एवं समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार द्वारा संयुक्त रुप से किया गया।
प्रशिक्षण के स्वागत सत्र में श्री रमाशंकर प्रसाद दफ्तुआर, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी,सक्षम-सह-निदेशक सामाजिक सुरक्षा एवं निःशक्तता निदेशालय ने बताया कि दिव्यांगजनों के लिए संचालित योजनाओं के अनुभव बताते है कि सटीक जानकारी एक साथ एक प्लेटफाॅर्म पर उपलब्ध हो। इसके लिए भारत सरकार द्वारा यू.डी.आई.डी.परियोजना आरंभ की जा रही है जिसके तहत दिव्यांगजनों से संबंधित सभी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी एक साथ प्राप्त होगी। यह परियोजना सभी दिव्यांगजनों को कार्ड के माध्यम से विशिष्टि पहचान देगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना में स्वास्थ्य, समाज कल्याण एवं राजस्व विभाग की अहम भूमिका होगी।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री अतुल प्रसाद, प्रधान सचिव, समाज कल्याण विभागने कहा कि हमें जो आईडी मिलती है हमें उसका मोल पता नहीं चलता है। लेकिन दिव्यांगजनों के लिए उनकी आईडी उनकी पहचान और सम्मान की बात है क्योंकि यह एक सरकारी दस्तावेज है। यह उनके सशक्तीकरण का माध्यम है। यू.डी.आई.डी. परियोजना आई डी के माध्यम से दिव्यांगजनों को सम्मान और सशक्तीकरण देगी। इस परियोजना के तहत डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर उपलब्ध आंकड़े दिव्यांगजनों सहित समाज के हर वर्ग के लिए उपयोगी होंगे। परियोजना के कुशल संचालन के लिए पदाधिकारियों को संवेदनशील होने की आवश्यकता है ताकि समय-सीमा के अंदर लाभार्थियों को सेवाएं मिलें। प्रतिभागियों को आह्वान करते हुए श्री प्रसाद ने कहा कि आप सब एक मिशन से जुड़ रहे है, एक अच्छा काम करने का माध्यम बनें।

यूडीआईडी परियोजना की जानकारी देते हुए निशक, श्री के.वी. एस. राव, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार ने बताया कि यह परियोजना सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतरीन प्रयोग पर आधारित है, जो दिव्यांगजनों की गतिशीलता संबंधी बाधाओं को दूर करेगी क्योंकि एक बटन दबाकर उन्हें सारी जानकारी मिल जाएगी, जिला स्तर पर लंबित आवेदनों की स्थिति कोई भी देख सकता है। इससे यथोचित कदम उठाने एवं निर्णय निर्माण में मदद मिलेगी। यह जानकारी गत्यात्मक होगी। इस तरह यह परियोजना दिव्यांगजनों की सभी समस्याओं पर एक साथ समग्र रुप से ध्यान दे सकेगी। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की कुछ श्रेणियां अभी तक उपेक्षित रही हैं लेकिन अब हम उन्हें छोड़ नहीं सकते। हमें प्रत्येक दिव्यांग को साथ लेकर चलना है क्योंकि उनका सामाजिक-आर्थिक योगदान देश की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

परियोजना के प्रायोगिक आयाम पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था के तहत एक राज्य में लागू किया गया विकलांगता प्रमाण पत्र सभी राज्यों में लागू होगा। निर्गत प्रमाण पत्र की प्रमाणिकता का यूडीआईडी का नम्बर डालकर पता किया सकेगा, जिससे अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा। उन्होंने बताया कि दिसम्बर 2018 तक हम सभी दिव्यांगजनों की पहचान इस परियोजना के माध्यम से कर लेेंगे। परियोजना के प्रथम चरण हेतु देश के 14 राज्यों-गुजरात, उत्तर प्रदेश, ओडीशा, हरियाणा, तेलंगाना, केरल, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, झारखंड एवं राजस्थान का चयन किया गया है जबकि शेष राज्यों में वर्ष 2018 तक यह कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

इस अवसर पर श्री शषि भूषण कुमार, सचिव, स्वास्थ्य सह, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति ने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है जिसमें स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। अस्थि संबंधी विकलांगता की पहचान करना तो आसान है मगर अन्य प्रकार की विकलांगताओं की पहचान एक चुनौती है। यह परियोजना हमें उन चुनैतियों से निपटने के लिए तैयार करेगी।

तकनीकी सत्र की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए श्री संजय बामेत, क्रियान्वयन प्रबंधक-यूडीआईडी ने बताया कि यह कोई नई योजना नहीं है बल्कि पूर्ववर्ती आंकड़ों को एक धरातल पर लाकर सुव्यवस्थित करने का प्रयास है।यह विकलांगता की स्थानीय स्तर पर व्यापक स्वास्थ्य समस्याओं की भी पहचान कर उन्हें समाहित करेगी जिससे स्थानीय समस्याओं को राष्ट्र व्यापी पहचान मिलेगी एवं उनका निराकरण होगा।
प्रशिक्षण में पटना प्रमंडल के सभी छः जिलों के सहायक निदेशक-सामाजिक सुरक्षा, सिविल सर्जन तथा प्रत्येक पदाधिकारी के दो-दो डेटा एन्ट्री आॅपरेटर ने भाग लिया। धन्यवाद ज्ञापन ज्ञापन श्री के.के. सिन्हा, वरीय प्रशासी पदाधिकारी, सक्षम द्वारा किया गया।