दीपावली में उल्लुओं की आई शामत, बली चढ़ा करते हैं पूजा

1018
0
SHARE

पटना: दीपों का त्योहार दीपावली हर्षोल्लास के साथ मनाते है लेकिन इस त्योहार में अंधविश्वास में पड़कर लोग उल्लू जैसे पक्षी की भी बलि देते हैं। तांत्रिक धन-वैभव विभिन्न तरह के दोषों को मिटाने के लिए और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस पक्षी की बलि देते हैं।

दीपावली जैसे जैसे करीब आती जाती है, तथाकथित तांत्रिक अपनी साधना को फलीभूत करने के लिए तेजी से काम शुरू कर देते है। धनतेरस से लेकर परेवा तक वो अपनी साधना को सिद्ध करने के लिए तंत्र व मंत्र की साधना में लीन हो जाते है। इसमें भी वो दिवाली की रात को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं।

दीपावली में पटना में भी उल्लुओं की मांग बढ़ गई है। हालांकि चोरी-छिपे इसे बेचा जा रहा है।तंत्र क्रिया करने वाले से एडवांस पैसे लेकर पक्षियों का व्यापार करने वाले उसे दो से छह हजार में बेच रहे हैं। दीपावली के दिन तांत्रिक तंत्र-मंत्र को जगाने का काम करते हैं। इसके लिए वह उल्लुओं की बलि देते हैं। वन अधिनियम के तहत उल्लुओं का शिकार करना दंडनीय अपराध है। इसके बाद भी पटना में उल्लुओं की खरीद-फरोख्त जारी है।

भारतीय वन्य जीव अधिनियम,1972 की अनुसूची-एक के तहत उल्लू संरक्षित है। ये विलुप्त प्राय जीवों की श्रेणी में दर्ज है। इनके शिकार या तस्करी करने पर कम से कम 3 वर्ष या उससे अधिक सजा का प्रावधान है। इनके पालने और शिकार करने दोनों पर प्रतिबंध है। पूरी दुनिया में उल्लू की लगभग 225 प्रजातियां हैं।