दीपावली में डाक बंगला क्षेत्र रहा सबसे प्रदूषित

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पटना: सेंटर फॉर इन्वारॉन्मेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) की ओर से दिवाली से पहले सप्ताह दिनांक 25 अक्टूबर से 29 अक्टूबर 2016 एवं दीवाली के दिनों के बीच परिवेशी वायु गुणवत्ता पर 24 घंटे निगरानी रखने के दौरान पाये गये अध्ययन आधारित डेटा का विमोचन किया गया।

चिंताजनक बात यह है कि पटना की परिवेशी वायु गुणवत्ता दिवाली की रात को बेहद खराब स्थिति में पाया गया। पिछले सप्ताह और दीपावली के दिन की तुलना करने पर पता चलता है कि जहां पीएम-10 स्तर में 1.4 गुणा का इज़ाफ़ा पाया गया वहीं पीएम-2.5 के स्तर में तीन गुणा की वृद्धि आंकी गयी। दीपावली की रात पीएम-2.5 का स्तर नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड से 6.6 गुणा और विश्व स्वास्थ्य संगठन सुरक्षा सीमा से 15.8 गुणा अधिक आंका गया। पार्टिकुलेट मैटर की सघनता में वृद्धि न केवल कैंसर का कारण बन सकती है। बल्कि यह गंभीर श्वसन और हृदय की बीमारियों को भी बढ़वा दे सकता है।

दीपावली की सुबह से लेकर दीपावली की आधी रात तक पीएण10 का स्तर औसत 378 माइक्रोग्राम / घन मीटर और पीएम 2.5 का औसत 301 माइक्रोग्राम / घन मीटर पाया गया। दिवाली के दिन डाक बंगला इलाके के पास हवा की गुणवत्ता सभी क्षेत्रों के तुलना में सबसे खराब पाया गया था। डाकबंगला के पास लगे एयर क्वालिटी स्टेशन में सबसे अधिक बढ़ोत्तरी रात के 10 बजकर 55 मिनट पर पाया गया। यहां पीएम10 692 माइक्रोग्राम / घन मीटर और पीएम2.5 659 माइक्रोग्राम / घन मीटर आंका गया। दूसरी सबसे अधिक बढ़ोत्तरी सुल्तानगंज में रात के 10 बजकर 43 मिनट पर पाया गया। यहां पीएम10 683 माइक्रोग्राम / घन मीटर और पीएम2.5 408 माइक्रोग्राम / घन मीटर आंका गया।

दिवाली रोशनी और उत्साह का शुभ त्योहार है। लेकिन पटाखों के रोशनी के चलते यह त्योहार हर साल वातावरण में वृहद स्तर पर विषैले प्रदूषक घोल रहा है। एक व्यापक और एहतियाती तरिके से पटना के चार अलग-अलग क्षेत्रों में डेटा का निगरानी किया गया। जिसमें डाक बंगला, पटना सिटी, सुल्तानगंज और भिखना-पहाड़ी शामिल है।

पार्टिकुलेट मैटर की सघनता को एक समय सीमा के दौरान सुबह के 6 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक आंके जाने पर पता चला की पूर्व दिवाली और दिवाली के तुलना में पीएम2.5 के स्तर में 49% की वृद्धि पायी गयी। वैज्ञानिक मापदंड के अनुसार दीपावली के दिन पटना शहर में प्रदूषण का स्तर सीवीयर कटेगोरि पाया गया।

सीड की प्रोग्राम मैनेजर अंकिता ज्योति ने बताया कि दिवाली पर अत्यधिक आतिशबाजी के चलते हवा में अलग-अलग विषेले प्रदार्थो का मिश्रण हो गया है। जो आने वाले अगले एक दो दिनों तक हवा में ऐसे ही बना रहेगा।

उन्होंने कहा की बिहार सरकार के द्वारा पटाखे ना जलाने को लेकर “से नो क्रेकर” नाम से जागरूकता अभियान का असर देखा गया है। लेकिन फिर भी दिवाली के दौरान मिले वायु प्रदूषण के आंकडें चिंताजनक है और ऐसा ही रहा तो आनें वाले समय में इसके गंभीर स्वास्थ्य संबंधी परिणाम सामने आ सकते है ऐसे में ज़रूरी है कि राज्य और केंद्र की सरकार स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी जारी करे।