धान बेचने के लिए किसानो को अभी और करना होगा इंतजार

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गया- जिले के 24 प्रखंडों के किसानो के सामने एक ही समस्या है आखिर सरकार धान कब खरीदेगी। 60 प्रतिशत किसानो ने अपने खेतो से धान काट कर रख लिया है सभी धान खलिहानो में पड़े है तो कुछ किसान अभी कटाई कर रहे है तो वहीं कुछ किसान धान को निकाल कर ओने पौने दामों पर बेचने की तैयारी में लगे हैं।

धान के फसल काटने के तुरंत बाद गेंहू लगाना किसानो के सामने बड़ी समस्या है। समस्या यह है की धान अभी बिकी नहीं है और न ही जो पूंजी और मेहनत लगा है उसका पैसा भी नहीं निकल पाया है ऐसे में गेंहू कहां से लगाए। कुछ किसानो ने बताया की और कोई रोजगार भी नहीं है। इसी खेती से बच्चो को पढ़ाना है कॉलेजो में फ़ीस जमा करना है तो ऐसी स्थिति में सरकार के भरोसे तो नहीं बैठ सकते है मजबूरी है की कम दामों पर ही धान को बेचा जाय, और अगर सरकार पैक्स के माध्यम से धान की खरीद करती भी है हमलोग छोटे किसान नहीं बेचते है क्योंकी पैक्स के माध्यम से बेचे गए धान का पैसा तुरंत नहीं मिलता है, हाँ बाजार मूल्य से अच्छा मूल्य मिलता है लेकिन समय पर पैसा नहीं मिलता है। 

इस संबंध में बिहार के कृषिमंत्री डॉ ० प्रेम कुमार ने बताया की राज्य के सभी जिलों के पैक्स को पैसा मिल चूका है। जल्द ही धान की खरीददारी होगी और बेहतर तरीके से होनी है क्यों की इसके बाद बिहार में धान की पैदावार लक्ष्य से अधिक हुई है। किसानो को सही मूल्य मिले ऐसी व्यवस्था सरकार की है। कृषि रोड मैप के जरिये किसानो को बेहतर भंडारण और बेहतर बाजार की व्यवस्था होनी है इसबार बिहार सरकार चावल, गेंहू और मक्का के अधिक उत्पादन के लिए पुरस्कार भी मिला है।

कृषि रोड मैप का मुख्य उद्देश्य है जैविक खेती को बढ़ावा देना है इसलिए 9 जिलो में जैविक कॉरिडोर और हर जिले में जैविक ग्राम 2022 तक बनाने का लक्ष्य है जिससे किसानो की आमदनी दोगुनी हो जायेगी। कृषि रोड मैप के माध्यम से हरित क्रान्ति की शुरुआत बिहार से होगी। उन्होंने बताया की बिहार में धान की नमी ज्यादा है नमी की जांच करने के लिए केंद्र सरकार की टीम बिहार आएगी। धान घोटाले पर उन्होंने कहा की घोटाले की विजिलेंस टीम बनाकर जाँच कराई जायेगी और सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।