नगर परिषद क्षेत्र में  2015-16 में चलाये गए विभिन्न योजनाओं में अनियमितता का मामला उजागर

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मुकेश कुमार सिंह

सहरसा – नगर परिषद क्षेत्र में  2015-16 में चलाये गए विभिन्न योजनाओं सहित खरीदी गई सामग्री में करोड़ों रूपये का वारा न्यारा का मामला सामने आया है। जिसमें बरती गई अनियमितता और लूट को लेकर पटना लोकायुक्त में याचिका दायर करने के पश्चात जांच को लेकर लोकायुक्त की तीन सदस्यीय टीम ने सहरसा नगर परिषद पहुँच सघन रूप से जांच शुरू कर दी है।

दरअसल मची लूट खसौट को लेकर हाईकोर्ट में 2016 में रीट याचिका दायर की गई थी जिसके बाद न्यायालय के आदेश पर लोकायुक्त में भी याचिका 2017 में दायर की गई जिसमें मलिन बस्ती में आवास योजना सहित डस्टबीन, ट्राली, वेपर व एलईडी खरीद में अनियमितता, सड़क सहित कई योजना में मची लूट की जाँच लोकायुक्त के द्वारा शुरू कर दी गई है। 

तक़रीबन तीन घंटे तक दस्तावेज को खंगालने के बाद जब लोकायुक्त पटना से आये अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि नगर परिषद से जुड़ा मामला है जिसकी जाँच की जा रही है। परिवाद पत्र लोकायुक्त में दायर की गई थी जिसके आधार पर कागजात खंगालने की बात कही और जाँच के बाद लोकायुक को जाँच रिपोर्ट समर्पित करने की बात कह जाँच से संतुष्ट होने तक जाँच करने की बात भी कही। 

लोकायुक्त की टीम नगर परिषद कार्यालय में कागजातों को खंगालने के बाद नगर परिषद क्षेत्र के कई वार्डों का स्थल निरीक्षण करने पहुंचे हैं। जहाँ पहुंचने के बाद मलिन वस्ती में दी गई आवास योजना का जाँच करते नजर आये। इनके द्वारा आवास योजना के लाभुकों से पूछताछ की जा रही है।

इस बाबत स्थल जाँच कर रहे लोकायुक्त के अधिकारी से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि तीन वार्ड में अभी जाँच कर चौथे वार्ड में जाँच करने की बात कही और सत्यापन की बात कही। हालांकि किसी तरह के बयान देने के लिये अधिकृत नहीं होने की बात उन्होंने कही। उसके बावजूद उन्होंने जाँच की प्रक्रिया को गोपनीय होने की बात की और परिवादी के शिकायत पर नियम कानून को लेकर की गई अनियमितता की जाँच की बात कही, जिसे लोकायुक्त को समर्पित करने की बात भी उन्होंने कही।

इस बाबत शिकायतकर्ता की माने तो नगर विकास द्वारा मलिन बस्ती के लिये 16 वार्डों के 900 लाभुकों को आवास योजना स्वीकृति देने की बात कही गई जिसमे भारी अनियमितता बरतने की बात उन्होंने कही। जिसकी शिकायत हाईकोर्ट में याचिका 2016 दायर किया गया था जिसके बाद माननीय न्यायलय द्वारा लोकायुक्त में याचिका दायर कर जाँच से संतुष्ट नहीं होने पर हाईकोर्ट आने की बात कही गई। जिसके बाद 2017 में लोकायुक्त में याचिका दायर की गई। जिसके बाद लोकायुक्त द्वारा तीन सदस्यी टीम गठित कर आवास योजना सहित कई योजना की।

जाँच की जाने की बात उन्होंने कही इतना ही नहीं नगर परिषद को महज 25 लाख की ही खरीदारी की अथॉरिटी होने की बात कह डेढ़ से दो करोड़ की खरीदारी ओने पोने दाम में करने की बात कही। वहीं वेपर लाईट मेंटनेंस जो दो वर्षो तक एजेंसी को करना था उसके मेंटेनेंस के नाम पर भी 20 से 25 लाख खर्च कर कागजी खानापूर्ति करने की बात भी कही।

बहरहाल जाँच अब भी जारी है ऐसे में इंतजार है जाँच रिपोर्ट आने का तब जाकर हीं फिगर साफ हो पायेगा कि बरती गई अनियमितता और लुट खसोट कैसे हुआ।