नदिया के उस पार

138
0
SHARE

दिलीप कुमारकैमूर – बिहार सरकार हाई टेक शिक्षा देने कि बात करती है पर बच्चों के स्कूल जाने के दौरान होने वाली समस्या पर ध्यान नहीं देती। कैमूर में 600 बच्चे जान जोखिम में डालकर जाते हैं स्कूल। नदी को नाव से पार करते है। एक नाव के सहारे 600 बच्चे जाते हैं स्कूल। नाव पर बैठने के लिए हर दिन बच्चे करते हैं झगड़ा, नाव पर ओवर लोड होकर पार करते है। कभी-कभी तो नाव डूबने का रहता है डर।

दुर्गावती प्रखंड के धडहर पंचायत के कानहापुर गाँव के पास कर्मनाशा नदी को पार कर उत्तर प्रदेश जाते हैं पढ़ने राज कुमार इंटर काँलेज भुजना चंदौली। जहाँ बिहार के बच्चे आधे से अधिक पढते है। बच्चे को प्रतिदिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कभी नदी में पानी ज्यादा आ जाता है तो इनकी नाव डुब जाता है, तो कभी नाव समय पर नहीं आता तो स्कूल छूट जाता है। एक बार में नाव पर 45 बच्चे पार करते है तो बाकी बच्चे नाव से पार करने का इंतेजार करते है। बच्चों में पढाई का हौसला भी इस कदर है कि प्रतिदिन स्कूल जाते है। बच्चों के नाव का किराया साल में एक बच्चे को 300 रूपया देना पड़ता है।

स्कूल के प्रिंसिपल भी कहते हैं कि बच्चे काफी संघर्ष कर स्कूल आते हैं। बिहार के बच्चे स्कूल में आधे से अधिक है। सभी को एक समान शिक्षा दिया जाता है।

ग्रामीण कहते हैं कि आजादी के बाद आज तक नदी पर पुल नहीं बना, जिससे काफी परेशानी होती है। सबसे ज्यादा बच्चों को होती है बिहार में पाँचवी के बाद स्कूल नहीं है। जिससे बच्चे नदी को नाव से पार कर उत्तर प्रदाश जाते हैं।

वहीं डीएम ने बताया कि नदी पर पुल के लिए डी.पी.आर तैयार कर पहले से भेजा गया है। प्रधान सचिव से बोलकर जल्द नदी पर पुल बनवाया जाएगा। साथ ही उस पंचायत में एक हाई स्कूल का भी निर्माण किया जाएगा, जिससे बच्चो को पढाई में असुविधा न हो।

बच्चे कहते हैं कि नदी पार करते समय डर तो लगता है पर क्या करे कोई दुसरा साधन नहीं है डर से स्कूल नहीं गए तो पढाई नहीं हो पाएगी। एक नाव है बच्चे ज्यादा है पहले हम पहले हम के चक्कर में झगड जाते है। कभी -कभी नदी में पानी ज्यादा हो जाता है तो नाव का घंटो इंतेजार करना पडता है। बारिश के मौसम में काफी परेशानी होती है। नाव डूबने का डर बना रहता है। इसलिए बच्चे चाहते हैं कि जल्द नदी पर पुल बन जाए।

नाविक भीम चौधरी कहते है कि चालिस वर्षों से नाव चला रहा हूँ एक स्कूली बच्चे पर 300 रूपया सलाना है पर कोई देता नहीं है कम पैसे देकर टाल देते है घर पर 10 किलो चावल और 10 किलो गेहूं देना है पर सभी नहीं देते है। पर बच्चो के भविष्य को देखते हुए समय पर आकर नाव चलाते है जिससे बच्चे स्कूल जा पाते हैं।