नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ 4 दिनों का महान पर्व चैती छठ

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पटना – सूर्योपासना का महान पर्व चैती छठ आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है जो चार दिनों तक रहेगा. नवरात्र के आगमन के साथ भक्तिमय हुआ पूरा बिहार. राजधानी के विभिन्न घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़. 22 मार्च को खरना, 23 मार्च को डूबते सूर्य को अर्घ और 24 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ देते हुए यह पूजा समाप्त हो जाएगी. बाजार में छठ पूजा को लेकर फलों और मिट्टी के बने चूल्हों की दूकान सज गई है.

साल में दो बार छठ पर्व मनाया जाता है. चैत्र में इसे चैती छठ कहते हैं. दूसरी बार कार्तिक माह में जिसे छठ पूजा कहते हैं. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नए साल के पहले महीने यानी चैत्र की षष्ठी तिथि को मनाये जाने के कारण इसे चैती छठ कहते हैं. पहला दिन यानी आज नहाय-खाय के दिन सेंधा नमक से बना अरवा चावल, कद्दू की सब्जी और चना के दाल का प्रसाद बनता है. अगले दिन से उपवास होता है. दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को पूरे नियम और आस्था के साथ प्रसाद बनाई जाती है. पूजा के बाद घर के सभी सदस्य प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करते हैं. जिसे खरना कहते हैं.

तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ देते हैं. इन चार दिनों में स्वच्छता और पवित्रता का बहुत ध्यान रखा जाता है. कड़े नियमों का पालन करते हुए पूजा को संपन्न किया जाता है. छठ पूजा और रामनवमी को देखते हुए सरकार ने सभी जिलों को अलर्ट रखने के निर्देश दिए हैं.


इस साल 25 मार्च को रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा. हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन रामनवमी का पर्व मनाते हैं. हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान राम का जन्म हुआ था. वैसे तो पूरे भारत में भगवान राम के जन्मदिन को बड़े उत्साह से मनाया जाता है लेकिन राम भूमि अयोध्या में इस अवसर पर भव्य मेले का आयोजन होता है. इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है. माना जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना भी रामनवमी के दिन शुरू की थी.