नापतोल अधिकारी बन साइबर अपराधियों ने थानाध्यक्ष को लगाया सवा लाख का चूना

603
0
SHARE

कैमूर/ संवाददाता-

साइबर अपराधियों ने शहर में अपना जाल इस कदर बिछा लिया है मानों प्रशासन ने खुली छूट दे रखी हो। पुलिस-प्रशासन का न तो कोई डर और न भय ! तभी तो एक वर्दी धारी को अपने झांसे में ले कर सवा लाख रुपया का चूना लगा दिया । यही नहीं फिर उसी वर्दी धारी को भी बेखौफ हो कर खुलेआम मोबाइल पर धमकी भई दे डाली कि जो करना है वो कर लेना। जो इस बात का गवाह है कि पुलिस-प्रशासन से अपराधी कितना खौफ खाते हैं ! यह सुनने में अटपटा जरूर लग रहा होगा लेकिन सत्य है। यह पूरा वाकया कैमूर जिले के एससी/एसटी थानाध्यक्ष के साथ हुआ है। आम आदमी की तो दूर की बात, एक थानेदार को ही ठगी का शिकार साइबर अपराधियों ने बना लिया। थानेदार के मोबाइल पर साइबर अपराधियों ने मैसेज भेज कर उसे एक सफारी गाड़ी जीतने का लालच दिया । जिसके बाद थानेदार जालसाजों के झांसे में आकर उसके बताए हुए बैंक खाता में बारी-बारी से कुल 4 बार में सवा लाख रुपया जमा कर दिये। उसके बाद भी जालसाजों द्वारा दोबारा जब थानेदार से अपने खाते में सवा लाख रुपया और मंगा जाने लगा तो थानेदार को उसके इस बात पर शक हुआ और उसने उसके खाते की जांच करना शुरू किया । खाते की जांच करने में पता चला की यह साइबर अपराधियों का काम है, जो थानेदार को अपने बातों के झांसे में लेकर कार्य किया । उसके बाद थानेदार अपने आप को ठगा महसूस करने लगा । उसने अपने ही थाने में उन अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया और तहकीकात करना शुरू कर दिया । पैसे डाले गए खाते के आधार पर जब तहक़ीक़ात किया तो पता चला कि खाता नवादा जिला के किसी पंकज पटेल के नाम से है, जो बिहार के नवादा जिले का है। जब थानाध्यक्ष नवादा जाकर पंकज पटेल के बारे में तहकीकात करना शुरू किया तो पता चला कि इस नाम का व्यक्ति वहां कोई नहीं है। नाम और पता बैंक खाते में फ़र्ज़ी दिया हुआ था । फिर उसने फोटो के आधार पर पहचान करना शुरू किया । लोगों ने उस व्यक्ति की पहचान कर उसका दूसरा पता बताया, जिसके आधार पर पुलिस ने नवादा पुलिस के सहयोग से उसे गिरफ्तार कर कैमूर लाई । जहां पर साइबर अपराधी ने अपने सारे जुर्म स्वीकार किया। उसने बताया कि मेरा फर्जी खाता खोलने और उसमें पैसा मंगाने की एवज में प्रति ट्रांजेक्शन मुझे पैसे दे दिए जाते थे । उसने अपने सभी साथियों के नाम भी बताएं कि यह लोग कहां के रहने वाले हैं लेकिन अभी भी इसका मास्टर माइंड पुलिस पकड़ से बाहर है। वहीं जालसाजों के शिकार हुए थानाध्यक्ष ने बताया मेरे मोबाइल पर एक मैसेज आया था टोल फ्री नंबर से, जिसमें मुझे एक सफारी गाड़ी लॉटरी में पड़ने की बातें लिखी गई थी । फिर नंबर से फोन आया उसने अपने आप को नापतोल विभाग का अधिकारी बताया । मेरे द्वारा नापतोल से की गई पहले की खरीदारी और मेरा पता सही बताया जिससे मुझे पूरा विश्वास हो गया की नापतोल विभाग से ही बोल रहा है । क्योंकि मैं नापतोल विभाग से अपने सारे सामान मंगाता हूं। उसके बाद मैं उसके झांसे में आ गया और उसने मुझे कागजी कार्रवाई पूरा करने के नाम पर चार बार में कुल सवा लाख रुपया उसके दिए बैंक खाते में डलवाए। उस खाते में डालने के बाद वह मुझसे पुनः सवा लाख जब मांग किया तो उसके बाद मुझे शक हुआ। जब मैंने तहक़ीक़ात करना शुरु किया और बैंक का स्टेटमेंट मंगाया तो कई लोगों द्वारा उसके खाते में पैसे डाले गए थे। उस पैसे को दूसरे खाता नंबर पर ट्रांसफर किए गया था। जिसका अनुसंधान में एक आरोपी को पकड़ा गया है और आरोपियों की तलाश के लिए हमारी टीम गठित है । बहुत जल्द उन्हें भी पकड़ लिया जाएगा ।