नाला निर्माण कार्य में हुए धांधली का खुलासा

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भोजपुर – भ्रष्टाचार के कारण कई बार जनता को विकास का मुँह तक देखने को नहीं मिलता और खास कर तब जब कोई बड़े कार्ययोजना में किसी बड़े पैमाने पर किये जा रहे भ्रष्टाचार के कारण परियोजना पर ब्रेक लग जाये। ताजा मामला है भोजपुर जिले के आरा नगर निगम का जहाँ भ्रष्टाचार के सामने विकास का कार्य घुटना टेकते हुए नजर आ रहा है। जहाँ एक तरफ बारिश के मौसम होने के कारण शहर के कई इलाकों में जलजमाव से लोग परेशान हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर इसी जलजमाव से निजात दिलाने के लिए आरा नगर निगम के वार्ड नंबर 44 में लगभग 4 करोड़ रुपए की लागत से 8 RCC नालों व रोड का निर्माण होने वाला था मगर निगम में टेंडर की आँख मिचौली के खेल में रातों रात सार्वजनिक लॉटरी में चुने गए संवेदक ( ठेकेदार ) प्रशांत कुमार का नाम पेपर से ही गायब हो गया और विकास के काम पर लगभग पूरी तरह ब्रेक लगता हुआ नजर आ रहा है क्योंकि आरा नगर निगम में यह सारा खेल महज पैसों की काली कमाई के लिए किया जा रहा है?

लॉटरी में चुने गए संवेदक प्रशांत कुमार को आजतक बोलकर अग्रीमेंट पेपर नहीं दिया गया जबकि अंदर ही अंदर इस परियोजना को किसी अन्य संवेदक के नाम पर स्वीकृति दे दी गई है। कई बार लिखित शिकायत देने के बावजूद भी इस पूरे प्री प्लांड भ्रष्टाचार में कोई कार्यवाई आजतक नहीं की गई है। वही दूसरी ओर यह मामला आरा नगर आयुक्त तक लिखित तौर पर पहुंच चुका है मगर यहाँ भी यह देखना है कि क्या पीड़ित संवेदक प्रशांत कुमार को आरा नगर निगम में इंसाफ मिल पाएगा या फिर उन्हें इंसाफ के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

इस पूरे मामले को देखा जाए तो एक तस्वीर तो साफ-साफ बनती है कि अब यहाँ नगर निगम में किसी भी कार्य परियोजना की सारी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आती है कि आखिर कैसे वीडियो रिकॉर्डिंग कैमरे की निगरानी में हुई लॉटरी की सारी प्रक्रिया सबके सामने पारदर्शी तरीके से होने के बावजूद भी आखिर कैसे चयनित संवेदक प्रशांत कुमार को धोखा दे दिया जाता है क्या यह पूरा मामला कहीं पैसे के बल पर योजना के टेंडर का खरीद फरोख्त का तो नहीं है। बहरहाल यह पूरा मामला अब नगर आयुक्त के सामने है देखना यह दिलचस्प होगा कि आखिर इस काले भ्रष्टाचार के पीछे कितने चेहरे छिपे हुए है।