नीतीश कुमार उलूल जलूल राजनीति नहीं करते : संजय सिंह

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पटना: जेडी(यू) मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद संजय सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा है कि श्री नीतीश कुमार को छोड़ कई नेता सिर्फ राजनीति कर रहे हैं लेकिन नीतीश कुमार सिर्फ काम करते है और काम करने पर ही विश्वास करते हैं। श्री नीतीश कुमार उलूल जलूल राजनीति नहीं करते हैं। आज लोग नीतीश कुमार को संकल्प पुरुष के रूप में देखते हैं और नतीजतन आज विकास हो रहा है। श्री नीतीश कुमार सामाजिक न्याय के पुरोधा हैं। न्याय के साथ विकास की अवधारणा को चरितार्थ कर उन्होंने समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। बिहार राज्य को एक नयी दिशा देने का काम किया है। समाज के दलित, महादलित, पिछड़े, अत्यंत पिछड़े, अकलियत एवं अन्य कमजोर वर्गों को पंचायती राज व्यवस्था में आरक्षण देकर राजनीति की मुख्य धारा में लाने के साथ ही उन्होंने सामाजिक शैक्षिक एवं सांस्कृतिक उत्थान की नयी इबारत लिखी है। अब श्री नीतीश कुमार जो एक गरीब के बेटा है उन्हे सम्मान मिल रहा है तो सुशील मोदी के छाती पर सांप लोट रहा है।

सुशील मोदी जी, सरकार ने अगले चार सालों में प्रदेश के एक करोड़ जिसमें महादलित भी शामिल हैं युवा के कौशल विकास का लक्ष्य निर्धारित किया है। श्री नीतीश कुमार के सात निश्चय में युवाओं की तरक्की और रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है। युवाओं की सफलता के लिए उनके कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में तत्पर है और इसीलिए राज्य सरकार के 7 निश्चय के तहत 38 जिलों के सभी प्रखंडों में कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया है। बिहार के युवा लगातार प्रशिक्षण प्राप्त कर नौकरी पा रहे हैं और अपना जीवन उज्जवल बना रहे हैं।

बिहार सरकार काम करने में विश्वास रखती है भाषणबाजी में नहीं। राजनीति में अच्छे काम का श्रेय लेना स्वाभाविक है। निःसन्देह, किसी योजना को शुरू करने से ज़्यादा महत्वपूर्ण उसे सफ़ल और उपयोगी बनाना है। श्री नीतीश कुमार ने अपनी योजनाओं को सफल बनाया है। श्री कुमार लगातार बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं तो समय के साथ उसमें बदलाव भी किये हैं। लेकिन प्रधानमंत्री और उनके गुरुकुल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अब ये भला कौन समझाये कि देश ने इनको नया इतिहास रचने का मौक़ा दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार नये नामकरण और इतिहास की मनचाही व्याख्या करने जैसे निरर्थक कामों में अपनी ऊर्जा लगा रही है। आप अपनी लक़ीर को लम्बा खींचिए, पुरखों की लक़ीर को मिटाकर कोई उसे कभी छोटा नहीं कर पाया ? इसीलिए इतिहास कितना भी ख़ूनी क्यों न हो उसे वैसा ही पढ़ाया जाना चाहिए जैसा कि वो था। क्योंकि आईना साफ़ करने से चेहरे की धूल नहीं हटती।