नीतीश कुमार बिहार में नाम मात्र के मुख्यमंत्री हैं- तेजस्वी यादव

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पटना- स्थानीय कृष्ण मेमोरियल हाॅल में आयोजित धानुक सम्मेलन का उद्घाटन भाषण करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि हमारे पिता ने पूरी जिन्दगी दलितों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों एवं अल्पसंख्यकों की लड़ाई लड़ते रहे और उनकी लड़ाई को आज मैं आगे बढ़ा रहा हूं। हमारे पिता लालू प्रसाद को गरीबों की लड़ाई लड़ने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा है। अगर मैं भी बीजेपी से हाथ मिला लिया होता तो मैं मुख्यमंत्री होता। लेकिन मैं कभी नीति एवं सिद्धांतों से समझौता नहीं करने वाला हूं। कुछ लोग जनादेश का अपमान किया है केन्द्र की सरकार अपने शासनकाल में चुनाव पूर्व किये गये वादे एक भी पूरा नहीं की है। चाहे वह दो करोड़ नौजवानों को प्रति वर्ष नौकरी देने की बात हो या बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की बात हो या बिहार को विशेष पैकेज के तहत सवा लाख करोड़ देने की बात हो, या प्रत्येक नागरिकों के खाते में 15-15 लाख देने की बात हो सारे वायदे जुमले ही साबित हुए हैं।

केन्द्र की सरकार संविधान बदलाना चाह रही है। ये लोग आपसे आपका वोट का भी अधिकार छिनना चाहती है। लेकिन मैं ऐसा होने नहीं दूंगा। मोहन भागवत पिछले 15 दिनों से बिहार में बैठे हैं और आरक्षण समाप्त करने की बात कर रहे हैं। नीतीश कुमार जो कि पलटू के राम के नाम से जाने जाते हैं एक समय संघ मुक्त भारत बनाने की बात करते थे और आज वे संघयुक्त भारत बनाने की बात करते हैं।

लालू गरीबों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों एवं अल्पसंख्यकों को जिस खूंटा से छोड़वाये उसी खूंटा से नीतीश कुमार उन लोगों को बांधना चाहती है और फिर से इन वर्गों के लोगों को गुलामी की जंजीर में बांधना चाहती है। मेरा केन्द्र सरकार से यह मांग है कि जातिये जनगणना का रिपोर्ट जल्द से जल्द सार्वजनिक किया जाय। आज केन्द्र हो या राज्य में इन वर्गों पर जुल्म ढाया जा रहा है। गुपचुप तरीके से ठेकेदारी में आरक्षण प्रथा को समाप्त कर दिया गया है। इन्होंने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार नाम मात्र के मुख्यमंत्री हैं। वे भाजपा एवं आरएसएस के इशारे पर काम कर रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी के लोग इन्हें पानी पिला-पिलाकर इनकी हालत खराब कर रहें है। बिहार में होने वाले उपचुनाव में इन्हें एक भी सीट नहीं मुहैया करायी गयी है। इनके सारे विधायक सड़क पर आने वाले हैं।

धानुक सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए संगठन के अध्यक्ष एवं पूर्व विधान पार्षद रामबदन राय ने धानुक जाति को सावधान रहने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि आज कुछ लोग धानुक बनकर उनके आरक्षण का लाभ उठाने का काम कर रही है। धानुक समाज ने ही नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के पद पर बैठाया था और आज धानुक समाज यह प्रण लेती है कि नीतीश कुमार को सत्ता से उखाड़ कर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनायेंगे।

धानुक सम्मेलन में निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किये गये।

1. धानुक समाज अपनी राजनैतिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन के कारण 19 प्रदेशों में यथा पश्चिम बंगाल, उतर प्रदेश, उड़ीसा आदि में यह जाति अनुसूचित जाति में शामिल है। ठीक उसी तर्ज पर बिहार में भी धानुक को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाय।

2. बिहार सरकार के ठेकेदारी प्रथा में प्रदत आरक्षण 15 लाख की सीमा बढ़ाकर 5 करोड़ किया जाय तथा बैंक की गारंटी स्वयं वहन करें।

3. केन्द्र सरकार के नौकरियों में मंडल कमीशन के तहत प्रदत आरक्षण की सीमा 27 प्रतिशत में से 18 प्रतिशत अतिपिछड़ों के लिए किया जाय।

4. बिहार सरकार के नौकरियों में प्रदत आरक्षण 18 प्रतिशत को बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया जाय। क्योंकि नीतीश सरकार के द्वारा दर्जन भर जातियों को अत्यंत पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया है।

5. स्वतंत्रता संग्राम में शहीद स्व0 रामफल मंडल की आदमकद प्रतिमा पटना के किसी चौराहा पर लगाया जाय। सभा को अन्य लोगों के अलावा प्रो0 रामबली सिंह चन्द्रवंशी, विधान पार्षद कमरे आलम, विधायक शक्ति सिंह यादव, रेखा पासवान, भाई अरूण कुमार, देवमुनी सिंह यादव, सुरेश सिंह निषाद, ई0 नरेश महतो, महेन्द्र विद्यार्थी, महेन्द्र भारती, विजय चैधरी, उपेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी आदि ने भी संबोधित किया।