नीतीश ने फिर अलापा विशेष राज्य का राग

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पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया को पत्र लिख कर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है। शनिवार को भेजे पांच पन्नों के अपने पत्र में नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार ने न्याय के साथ विकास के मॉडल पर चल कर अपने बल पर डबल डिजिट में विकास दर हासिल की है।

लेकिन,जब तक बिहार जैसे पिछड़े राज्य को विशेष सहायता, विशेष दर्जा और नीतिगत मदद नहीं की जायेगी, देश पूरी तरह विकसित नहीं हो पायेगा। उन्होंने टिकाऊ विकास और एजेंडा, 2030 की चर्चा करते हुए कहा कि देश की आबादी का कुल आठ प्रतिशत बिहार में है लेकिन,राष्ट्रीय स्तर पर जीडीपी का महज तीन प्रतिशत ही हिस्सेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने दम पर किये जा रहे कार्य के बावजूद बिहार की प्रति व्यक्ति आमदनी राष्ट्रीय औसत से आधे से भी कम है। आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण के हिसाब से भी अन्य राज्यों से बिहार पीछे है। लगभग सभी क्षेत्रों में दो अंकों में बिहार ने आर्थिक विकास दर हासिल की है। रघुराम राजन कमेटी की रिपोर्ट की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रिपोर्ट में बिहार, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश ,झारखंड, मेघालय, यूपी सबसे कम विकास दर वाले राज्यों में सूचीबद्ध है। इन राज्यों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सकारात्मक राजनीतिक पहल की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय योजनाओं में राज्यों की हिस्सेदारी को 60:40 की जगह 90:10 या 75:25 करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र के नये फार्मूले से राज्यों पर केंद्रीय योजनाओं का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह शत-प्रतिशत केंद्रीय योजना है। इसमें बिहार सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। उन्होंने नीति आयोग पर बिहार कम्पलेक्स से बाहर निकलने का आहवा्न करते हुए कहा कि हमने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री समेत लगभग सभी फोरम पर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का मसला उठाया। लेकिन, 104 मिलियन बिहारियों की भावना का ख्याल कहीं नहीं रखा गया।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि विश्व स्तर पर स्वीकार किया गया है कि एसडीजी को प्राप्त करने के लिए मौलिक परिवर्तन जरूरी है। नीति आयोग भारत में बड़े बदलाव के पक्ष में है। मैं इस संदर्भ में आपका ध्यान इस बात की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं कि बिहार ने अनेक परिवर्तनकारी कदम उठाये हैं। हमने गुड गवर्नेस 2015-2020 शुरू किया है। इसमें बिहार विकास मिशन, आपदा जोखिम कमी रोड मैप 2015-2030, पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण, महिलाओं के स्वयं सहायता ग्रुप के लिए जीविका कार्यक्रम, पूर्ण नशाबंदी तथा पात्रता और पुनर्वास आधारित कार्यक्रम, हमारे सात संकल्प शामिल हैं।

इनके अलावा बिहार के नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए हमने लोक सेवा का अधिकार तथा लोक शिकायत निवारण कानून लागू किये हैं। इन सभी परिवर्तनकारी उपायों को पूरा करने के लिए राज्य को बहुत बड़े आर्थिक स्त्रोत की आवश्यकता है, किंतु अब तक केंद्र सरकार से निराशाजनक प्रतिक्रिया मिली है। एसडीजी और एजेंडा 2030 केंद्र सरकार को अपनी जिम्मेवारी तय करने का अवसर देता है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि नीति आयोग बिहार की भावनाओं का ख्याल रखेगा व स्पेशल पैकेज देने पर विचार किया जायेगा।