नेशनल गर्ल चाइल्ड डे

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सुप्रिया सिन्हा

पटना हर साल देश में 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस उत्सव को शुरुआत करने का उद्देश्य यही है कि देश में लड़कियों के लिए नए मौके और समर्थन दिया जाए। सोशल नेटवर्किंग के इस दौर में सभी लोग अपने एकाउंट से एक पोस्ट कर इस दिन की शुभकामना दे रहे और अपने कर्तव्य को पूरा करने का बात समझ रहे। क्या केवल इस दिन की बधाइयाँ देने से देश की हर लड़की सही मायने में यह उत्सव मना पायेगी?

राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस समाज में बालिकाओं के साथ हो रहे असमानताओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। लड़कियों के साथ हो रहे भेदभाव एक बहुत बड़ी चुनौती है देश के विकास में। चाहे बात शिक्षा की हो, पोषण की हो, सुरक्षा की हो या कानूनी अधिकार की हो। बिहार सरकार ने हाल ही के दिनों में बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ मानव श्रृंखला बनाया। जिसमें राज्य के लाखों लोगों ने भाग भी लिया। परन्तु सरकार के सामने यह चुनौती है कि मानव श्रृंखला सही मायने में सफल हुआ है या यह केवल एक दिन की जश्न थी।

लड़कियों के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे सशक्त बनें और सुरक्षा के लिए बेहतर माहौल प्राप्त करें। उन्हें अधिकारों और मौलिक आजादी के बारे में ज्ञान हो ताकि वे अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें।

देश में बालिका शिशु की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने विभिन्न कदम उठाए हैं।

1 – गर्भावस्था में क्लीनिकों के द्वारा लिंग पता करने को सरकार द्वारा गैर कानूनी करार दिया गया।

2 – बाल विवाह निषेध है। इसके लिये एक्ट भी लागू किये गये हैं, बाल विवाह रोकथाम एक्ट 2009

3 – दहेज रोकथाम एक्ट 2006 आदि।

4 – बच्चियों को पढ़ाई की ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए यूनिफार्म, मिड-डे मील, शैक्षणिक वस्तुओं का वितरण।

5 – पीएम मोदी द्वारा 2015 में लाया गया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना।

इन सबके बावजूद हमारे देश में महिला साक्षरता दर अभी भी 53.87% है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 1000 पुरुषों पर 918 महिलाएं हैं। एक तरफ देश कल्पना चावला, सानिया मिर्जा, किरण बेदी, ऐश्वर्या राय जैसी बेटियों पर गर्व महसूस करता तो वहीं दूसरी ओर निर्भया काण्ड जैसे घटना देश की हकीकत बयां करती है। राष्ट्रीय बालिका दिवस तभी सफल होगा जब देश मे बालक-बालिकाओं के बीच की गहरी खाई भर जाएगी। जब देश की बेटियां बेफिक्र होकर सड़कों पर चल सकेंगी। जब उनसे रिश्ता जोड़ने के लिए लोग अपने बेटों का सौदा करना बंद कर देंगे। PC & PNDT Act के तहत शिशु का लिंग चयन और परीक्षण एक दंडनीय अपराध है।