न्यायपालिका को दबाव मुक्त करे सरकार – सदानंद सिंह

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पटना – बिहार कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष न्याय का तकाजा है कि मोदी सरकार न्यायपालिका को दबाव मुक्त करें| न्यायपालिका और कार्यपालिका में टकराव न सिर्फ देश की जनता, लोकतंत्र और शासन पद्धति के लिए चिंता की बात है; बल्कि संविधान की भावना के प्रतिकूल भी है|

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के कई वरिष्ठ जजों ने सीजेआई को पत्र लिखकर कार्यपालिका के कार्यकलाप पर सवाल उठाया है| कानून मंत्री के द्वारा कोलेजियम की सिफारिशों को अनसुना कर कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को जस्टिस पी. कृष्णा भट्ट के खिलाफ जाँच के लिए पत्र लिखना अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता है| उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम के करीब 230 नामों के प्रस्ताव को केंद्र सरकार द्वारा लंबित रखना त्वरित न्याय के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता है| जस्टिस रामेन्द्र जैन को पंजाब–हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थायी जज बनाने के कोलेजियम की सिफारिशों को केंद्र के द्वारा बार–बार लौटाना न्यायपालिका में सरकार का अनावश्यक हस्तक्षेप को दर्शाता है |

उन्होंने कहा कि ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं जो संकेत देता है कि न्यायपालिका सरकार के दबाव को झेल रही है| संविधान में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को जनहित में कार्य करने के लिए स्वतंत्र रखा गया है| फिर मोदी सरकार न्यायपालिका पर अनावश्यक दबाव डालने का प्रयास क्यों कर रही है?