न्याय के मंदिर में टंगे नोटिस से खलबली

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सुप्रिया सिन्हा

पटना- “आप सभी विद्वान अधिवक्तागण, अधिवक्ता लिपिक, मुवक्किलगण एवं आम लोगों को सूचित किया जाता है कि व्यवहार न्यायालय के कर्मचारियों के साथ पेशी एवं अवैध राशि की लेन-देन नहीं करें। किसी भी व्यक्ति एवं कर्मचारी के द्वारा पेशी के नाम पर अवैध राशि के लेन-देन की जाती है तो इसकी सूचना प्रशासन को अविलंब सूचित करें।” ऐसा नोटिस पटना जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा व्यवहार न्यायालय के बाहर चिपकाया हुआ है।

क्या कोर्ट के बाहर चिपके इस नोटिस से क्या घूसखोरी बन्द हो जाएगी ? क्या सरकारी कर्मचारी नहीं जानते कि घूसखोरी कानूनी रूप से जुर्म है? यह नोटिस पढ़ने के बावजूद उनमें इतनी साहस है कि वे भ्रष्टाचार जैसे अग्निकुंड में कूद पड़ेंगे और उन तमाम जनता जो कि न्याय के आस में कोर्ट का चक्कर लगाते, उन्हें अपना काम निकलवाने के लिए भ्रष्टाचार के जाल में फंसने के लिए मजबूर किया जाता है!

भ्रष्टाचार किस कदर कानून व्यवस्था में भी अपनी जगह बना चुकी है, इस बात का खुलासा रिपब्लिक टीवी के तेज तर्रार पत्रकार प्रकाश सिंह ने किया। जानते तो सभी थे पर इसे दिखाने का साहस रिपब्लिक टीवी के संपादक प्रमुख अर्नब गोस्वामी ने दिखाया। पटना ज़िला न्यायालय कोर्ट रूम के अंदर कर्मचारी, बिचौलिये, फर्जी कर्मचारी यहाँ तक की रूम में मौजूद पुलिसकर्मी भी इस भ्रष्टाचार में शामिल थे और मूकदर्शक बन कर पैसों का खेल देखते रहे। भ्रष्टाचार के इस खेल को कैमरे में कैद कर जग जाहिर किया गया कि कैसे खुलेआम कर्मचारी अपने पॉकेट को गर्म कर रहे हैं। चाहे बात कोर्ट से तारीख लेने की हो, कानूनी कागजात की या फर्जी जमानत की। यहाँ तक की अपराधियों को मनचाहे जेल भेजने के लिए भी पैसों का खेल होता है। कैमरे में कैद यह घटना अंदर की सब राज उगल रही है।

हम लोग सुनते आए हैं कि भारतीय न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार जैसा कुरीति व्याप्त है। हममें से कई लोगों ने यह महसूस भी किया है। हमें मालूम है कि न्याय के लिए कानून का दरवाजा खटखटाना कितना महँगा पड़ता है। फिलहाल ये नोटिस का नोटिस लिया जाता है या नहीं इसकी भी पड़ताल भविष्य में किया जाना चाहिए।