पंचतत्व में विलिन हुए दारोगा विजय चंद्र शर्मा, सात माह के पुत्र ने दी मुखाग्नि

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थानेदार विजय चंद्र शर्मा का मंगलवार को मुंगेर के गंगा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। सात माह के पुत्र ने उन्हें मुखाग्नि दी। उनका पार्थिव शरीर सोमवार को जमालपुर के छोटी केशोपुर गांव स्थित उनके पैतृक आवास पर लाया गया था लेकिन कुछ परिजनों के आने के इंतजार के कारण मंगलवार को अंतिम संस्कार हुआ। मंगलवार कोलकाता से उनकी एक बहन गांव पहुंची। 10 बजे उनकी शव यात्रा निकली। विजय चंद्र शर्मा के अंतिम दर्शन के लिए जमालपुर के बुद्धिजीवी, राजनीतिक दल के नेता, पुलिसकर्मी व भारी संख्या में आम लोग पहुंचे। शवयात्रा गांव से पैदल जमालपुर पहुंची। वहां से मुंगेर पहुंचने के बाद शव को जेल परिसर ले जाया गया, जहां उनके बड़े भाई मनीष शर्मा अपनी पत्नी की हत्या के मामले में बंद हैं।

हवाई अड्डा के रनवे पर कथित दुर्घटना में तिलकामांझी थानेदार विजयचंद्र शर्मा की मौत का मामला संदिग्ध बन गया है। थानेदार के परिजन इसे हत्या मान रहे हैं, जबकि पूरे मामले में पुलिस की अत्यधिक सक्रियता से सवाल उठने लगा है। सवाल उठना लाजिमी भी है क्योंकि पुलिस ने सारा काम आनन-फानन में किया। घटनास्थल से लाश उठाने और पोस्टमार्टम कराने में पुलिस की यह सक्रियता कुछ अटपटी लग रही है। पहले भी जिले में थानेदार की मौत हुई है, लेकिन उसमें पुलिस ने इस तरह की सक्रियता शायद नहीं दिखाई हो। अपराधी टोपला यादव से लोहा लेते शाहकुंड थाने के दारोगा अविनाश शहीद हो गए थे। अब तक टोपला नहीं पकड़ा गया है। उस पर इनाम घोषित किया गया है।

छोटी केशोपुर गांव में शवयात्रा के दौरान मातम छाया रहा। थानेदार की पत्नी प्रियंका कुमारी अपने बेटे को गोद में लिए हुई थी। वह एक ही बात बार-बार कह रही थी कि अब तुमको बेटा कौन कहेगा। मां और बहन का भी रो-रोकर बुरा हाल था। लोजपा नगर अध्यक्ष बुलबुल तांती और भाजपा नगर अध्यक्ष शंभू शरण सिंह ने मांग की है कि विजय चंद्र शर्मा की मौत की निष्पक्ष जांच हो।

जब थानेदार के परिजन हत्या का आरोप लगा रहे हैं तो फिर पुलिस ने एफएसएल की टीम से घटनास्थल की जांच क्यों नहीं कराई। अगर यह हत्या का मामला होता तो एफएसएल जांच में उसके सबूत मिलते। अगर नहीं होता तो दुर्घटना का सबूत मिलता। पुलिस के पास परिजनों को बताने के लिए एफएसएल की जांच रिपोर्ट एक बड़ा आधार होता। लेकिन पुलिस ने घटनास्थल और घटना की एफएसएल टीम से जांच ही नहीं कराई। आखिर इसके पीछे क्या मंशा हो सकती है ? क्या पुलिस नहीं चाहती है थानेदार के कथित दुर्घटना की मौत का राज का पर्दाफाश हो ? वैसे आजकल तो शहर में छोटी-मोटी घटनाओं में एफएसएल जांच हो जाती है।