पटना की खूबसूरत इमारत सुल्तान पैलेस में बनेगा पहला पांच सितारा होटल

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बिहार के इतिहासिक धरोहरों में से एक पटना का सुल्तान पैलेस का नाम भी शुमार किया जाता है। पटना के वीरचंद पटेल पथ से गुजरते हुए लोगों की नजरें अनायास ही सुल्तान पैलेस पर ठहर जाती हैं। इंडो – सारसेनिक शैली में बनी इस इमारत अब परिवहन विभाग का कब्जा है।  इस खूसूरत इमारत पर बिहार का पहला पांच सितारा होटल बनाने की कवायद चल रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार में पर्यटन को बढावा देने का ऐलान अपने भाषनों में कई बार कर चुके है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने बिहार के ऐतिहासिक धरोहर को फिर से चमकाने का निर्देश दिया है। उनका मानना है कि प्रदेश में हेरिटेज पर्यटन की अत्यधिक संभावना है। सुल्तान पैलेस उसकी पहली कड़ी है। इस पांच सितारा होटल में परिवर्तित करने की जिम्मेदारी संयुक्त रुप से पर्यटन और परिवहन विभाग की होगी।

सुल्तान पैलेस में वर्षों से बिहार राज्य पथ परिवहन निगम का मुख्यालय है इसे 1000 करोड़ में परिवहन निगम से खरीद कर पर्यटन विभाग को दिए जाने की औपचारिकता शीघ्र पूरी की जाएगी। पथ परिवहन  निगम मुख्यालय को फुलवारीशरिफ स्थानांतरित किए जाने की बात कर रहे है।

सुल्तान पैलेस का इतिहास

सुल्तान पैलेस औपनिवेशिक दिनों की सबसे खूबसूरत इमारतों में से है जिसमें पूरब और पश्चिम का अद्वुत सम्मिश्रण है। जिन दिनों यह इमारत बनायी जा रही थी, उन दिनों हिंदुस्तान के अभिजात वर्ग और रईसों में गोएथिक शैली को लेकर खास आकर्षण था, किन्तु इसके निर्माता सर सैयद सुल्तान अहमद ने अपने देश की परंपरा का निर्वाह करते हुए इसके निर्माण में मुग़ल – राजपूत शैली को खास जगह दी।

हिन्दुस्तान की प्रसिद्ध गजल गायिका बेगम अख्तर ने कहा था कि सर सुल्तान अहमद के सामने जिसने अपनी कला का प्रदर्शन किया हो, वह कलाकार कहलाने के योग्य नहीं है। यही कारण था कि सुल्तान पैलेस की दीवारें उस्ताद फैयाज खां, अब्दुल करीम खां, रसूलन बाई, रौशन आरा बेगम, गिरजा देवी जैसे सुप्रसिद्ध कलाकारों के सरगम से गूंजती रहती थी। वाद्य यंत्र के विश्व प्रसिद्ध कलाकार उस्ताद अलाउद्दीन खां, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां भी यहां आते रहते थे।

इस खूबसूरत इमारत का निर्माण पटना विश्वविद्यालय के पहले भारतीय कुलपति सर सुल्तान अहमद ने 1922 में कराया था। उस दौरान इसके निर्माण में 22 लाख रुपए खर्च किए गए थे। सर सुल्तान अहमद 1923 से लेकर 1930 तक पटना विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। उनके वक्त में ही पटना विश्वविद्यालय में साइंस कॉलेज, मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज संपूर्ण रूप से बन सका।

सुल्तान पैलेस को अली जान ने अपने कुशल हाथों से महल की दीवारों को फूल-पत्तियों की चित्रकारी से सजाया था। इसके निर्माण में सफेद संगमरमर का खूब इस्तेमाल किया गया था। प्रांगण के सभी सजावट पाश्चात्य स्थापत्य कला की उत्कृष्टता के प्रमाण हैं। इस पर की गई अनुपम नक्काशी उस समय के जाने-माने कारीगर मंजुल हसन काजमी ने की थी। इसे बनाने में सुल्तान अहमद ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। पैसा भी उन्होंने पानी की तरह बहाया था।

मुख्य हॉल और डाइनिंग रूम की छत, दीवारों की नक्काशी पर 18 कैरेट सोने का पानी चढ़ाया गया था। महिलाओं के रहने की जगह को सुन्दर बनाने के लिए वहां चीनी मिट्टी के रंग- बिरंगे टुकड़ों से सुन्दर फूल-पत्तों की आकृति बनाई गई थी। दीवारों पर उकेरी गयी नक्काशी काफी उम्दा लगती है।