पटना की शेरशाह मस्जिद की खूबसूत नक्काशी की बेजोड़ नमुना

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पटना: शेरशाह सूरी मस्जिद राजधानी पटना के अशोक राजपथ के करीब आधा किलोमीटर पूरब धवलपुरा मोहल्ले में शेरशाह की मस्जिद के नाम से विख्यात विशाल मस्जिद है। शेरशाह सूरी मस्जिद को शेरशाही भी कहा जाता है। यह मस्जिद वास्तुकला की अफगान शैली का एक उम्दा उदाहरण है। 1540-1545 में इसे शेरशाह सूरी ने अपनी श्रेष्ठता के उपलक्ष्य में बनवाया था।

इस मस्जिद के परिसर के अंदर एक कब्र मौजूद है जिसे एक अष्टकोणीय पत्थर की स्लैब से सहारा दिया गया है। शेरशाह सूरी मस्जिद का मुख्य आकर्षण उसका केंद्रीय गुंबद है जो चार छोटे गुंबदों से घिरा हुआ है। इन गुंबदों की विशिष्टता इस बात में निहित है कि किसी भी कोण या दिशा से देखने पर केवल तीन गुंबद ही दिखाई देते हैं।

यह काफी ऊंचाई पर है तथा भवन निर्माण की दृष्टि भी उल्लेखनिय है। स्थापत्य एवं विशालता की दृष्टि से यह नगर का सबसे महत्वपूर्ण मुस्लिम धर्म श्तान है। इसके अंदर बड़ी सुंदर नक्काशी की गई है। उसके बड़े-बड़े वृत्ताकार गुंबद दूर से ही लोगों का आकर्षित करते है। वर्ष 1934 के भूकंप में यह काफी क्षतिग्रस्त हो गई थी। बाद में श्रद्दालु मुस्लिम जनता ने इसकी मरम्मत कराई।

कहते है शेरशाह ने इसे स्वंय बनवाया था। बंगलुरु एक टीम ने वर्ष 1872 में इसका निरीक्षण किया था और मस्जिद के बीच वाले बड़े गुंबद के नीचे शेरशाह का नाम लिखा देखा था। मस्जिद परिसर में ही मुहम्मद मुराद शहंशाह सूफी (वर्ष 1543) की मजार है। मस्जिद 93 वर्ग फीट क्षेत्र में बनी है। इसके चारों ओर काफी खुली जमीन है। सामने एक सरकारी स्कूल है। अधिकांश पर अब कल कारखाने मोटर गैराज तथा घर बन गए है।