पटना के इस पूजा समिति में कार्यकर्ता से लेकर कारीगर तक हैं मुसलमान

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पटना: बिहार में नवरात्र को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। राज्य भर में पर्व के उत्साह के बीच सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीरें भी लगातार देखने को मिल रही हैं। इस क्रम में राजधानी पटना के एक पूजा समिति के सदस्य पिछले 50 सालों से लगातार भाईचारा के साथ-साथ कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहे हैं।

राजधानी के गोलघर चौक स्थित पूजा समिति में पिछले 50 सालों यानि पांच दशक के लंबे समय से हिन्दू-मुस्लिम एक साथ मिल कर पूजा कर रहे हैं। एकता ऐसी की पूजा समिति के सदस्यों से लेकर पंडाल निर्माण तक करने वाले कारीगरों में से आपको पहचानना मुश्किल होगा कि कौन हिंदू है और कौन मुसलमान।

पटना के पूर्व मेयर कृष्ण मुरारी यादव की अध्यक्षता वाली यह पूजा समिति इस बार मदुरै के मीनाक्षी मंदिर को पंडाल के रूप में बना रही है। पंडाल निर्माण का जिम्मा झारखंड के मधुपुर से आये मोहम्मद युनुस के नेतृत्व में दर्जन भर मुसलमान कारीगर संभाल रहे हैं तो पूर्व मेयर की अध्यक्षता वाली पूजा कमिटी में जावेद से लेकर समीर अंसारी जैसे कार्यकर्ता कोषाध्यक्ष और सचिव की भूमिका का बखूबी निर्वहण करते हैं।

झारखण्ड से आये मोहम्मद युनुस बताते हैं कि गिरिडीह जिले का पूरा बरकुंडा गांव ही पंडाल निर्माण का काम करता है और गांव का हर कारीगर पूरी तनम्यता के साथ हर साल मां के लिए पूजा पंडाल बनाता है। मोहम्मद बारीक़, फारुख, गुलाम, नसीम, सोहराब जैसे कारीगर राजधानी के राजेन्द्र नगर, दानापुर, पटना सिटी, फुलवारी आदि जगहों पर कई सालों से लगातार पूजा पंडाल बना रहे हैं।

इलाके में हिंदू-मुसलमानों की आबादी का हिसाब 60 और 40 का है यानि 60 फीसदी हिन्दू और 40 फीसदी मुसलमान लेकिन कमिटी में ये हिसाब लगभग बराबर आ बैठता है यानि आधे कार्यकर्ता मुस्लिम तो आधे हिन्दू। पूजा समिति के कोषाध्यक्ष दीपू शाह ने बताया कि इलाके में कभी लगता ही नहीं की किसी खास कौम का पर्व है।

खास कर ऐसे मौकौं पर भी जब एक साथ दोनों कौमों का पर्व हो जैसे इस बार का पर्व जिसमें मुहर्रम और दशहरा साथ-साथ है। कमिटी के सदस्य मोहम्मद जावेद, समीर अंसारी, तनवीर आलम, जुनैज अली, मोहम्मद नूरैन अशरफ ने बताया कि हम साथ-साथ दशहरा-दीवाली मनाते हैं और साथ-साथ ईद-मुहर्रम भी।

पूजा समिति के लोगों ने कहा कि इस बार भी हमारी पूरी कोशिश है कि हम दशहरा के अगले दिन यानि 13 अक्टूबर को ताजिया निकालें ताकि दशहरा के साथ-साथ मुहर्रम को भी अच्छे से मनाया जा सके।

सभार: अमरेंद्र कुमार(ईटीवी)