पटना में भारतीय डाइटेटिक एसोसिएशन द्वारा आयोजित हुआ न्यूट्री उत्सव 2019

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पटना – गर्भवती माताओं को सही पोषण मिले, सही आहार मिले तो कम बच्चे कुपोषित पैदा होंगे. गर्भवती माताएं खून की कमी से भी जूझती हैं जिसके कारण भी कम वजन के बच्चों का जन्म होता है” “हित के अनुसार से भोजन करों, कम खाओ और ऋतु के हिसाब से खाओ ऐसा वर्णन हमारे शास्त्रों में भी है. भारत में जो खाद्य विविधता है वो दुसरे देशों में नहीं है फिर भी हमारे बच्चे कुपोषित है यह चिंता का विषय हैं. बच्चे जब कुपोषित होंगे तो बीमारियों के शिकार हो जाते हैं.

उक्त उदगार अश्विनी कुमार चौबे, राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इंडियन डायटेटिक एसोसिएशन, बिहार चैप्टर के द्वारा आयोजित न्यूट्रीउत्सव 2019 के उद्घाटन के दौरान व्यक्त किये. अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि हर कोई जानता है कि अच्छा भोजन क्या है और पौष्टिक क्या है, लेकिन माताएं हमें बताती हैं कि क्या खाना चाहिए और कब खाना चाहिए। एक तरीके से डायटीशियन की भूमिका बहुत हद माँ की भूमिका के समान है। वे हमें वजन, स्वास्थ्य और चिकित्सा इतिहास के आधार पर एक उचित आहार योजना के बारे में बताते हैं। उन्होंने कहा की सभी जिला अस्पतालों और निजी अस्पतालों में भी डायटीशियन होने चाहिए.

पोषण अभियान के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत 8 मार्च को की गई थी. यह कोई कार्यक्रम नहीं बल्कि जनआन्दोलन हैं. इसका लक्ष्य नाटापण, कुपोषण और कम वजन के जन्म वाले बच्चों की के आंकड़ों में 2 % प्रतिवर्ष के हिसाब से कम करना और एनीमिया में 3 प्रतिशत की कमी करना है. इसमें कम्युनिटी बेस्ड इवेंट को भी प्रमोट किया जाता है. इसके तहत 5 लाख से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किये जा चुके हैं. अभी उपराष्ट्रपति ने पोषण एंथम को लांच किया है. लोकसभा के अध्यक्ष ने सभी सांसदों को अपने-अपने क्षेत्र में पोषण अभियान के बारे में लोगों को जागरूक करने को कहा है. कुपोषण में स्वछता की भूमिका के बारे में बताते हुए कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के बाद लोग जागरूक हो रहे हैं इसके माध्यम से बच्चों को कई बीमारिया से बचाया जा रहा है.

कार्यक्रम का उद्घाटन अश्विनी कुमार चौबे, राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएं निदेशालय , समाज कल्याण विभाग, आलोक कुमार, नोडल पदाधिकारी, पोषण अभियान बिहार श्वेता सहाय, पोषण विशेषज्ञ, यूनिसेफ, रवि पाढ़ी, डॉ इश्पिता चक्रबर्ती, चीफ डायटीशियन, सीएमआरआई, कलकत्ता, डॉ सत्यजीत कुमार सिंह, रुबन मेमोरियल अस्पताल, डॉ ए के जायसवाल, प्रोफेसर, पीएमसीएच, ऋचा जायसवाल, संयोजक, इंडियन डायटेटिक एसोसिएशन, बिहार चैप्टर डॉ ममता कुमारी, डॉ मनोज कुमार, पल्लवी सुप्रिया, जोसफिन पीटर, रुबीना परवीन, हीना, सुषमा सुमन और नाहिदा, डायटीशियन की उपस्थिति दीप जला कर किया गया.

यूनिसेफ़ के पोषण विशेषज्ञ , रवि पाढ़ी ने कहा की नाटापन, दुबलापन, और अल्प वजन के साथ ही बदले खानपान, प्रदूषण और खेती में ज्यादा खादों के प्रयोग से कुपोषण से सम्बंधित दूसरी समस्याएँ जैसे सुक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, विटामिन बी १२ की कमी जैसी दूसरी समस्याएँ हो रही हैं. सीएमआरआई, कलकत्ता की मुख्य डाइटीशियन डॉ इश्पिता चक्रवर्ती ने किडनी की समस्याओं के बारे में बात की और बताया कि कैसे करीब 40.3% किडनी की समस्या की वजह डायबिटीज है. इसकी वजह मुख्यतः मोटापा और डायबिटीज है जो एक डाइटीशियन की भूमिका को महत्वपूर्ण बना देता है.

एम्स दिल्ली की डाइटीशियन ऋचा जायसवाल ने कहा कि मेटाबोलिक सिंड्रोम कई बीमारियों का समूह है. इससे बचने के लिए शराब और तम्बाकू से दूरी और वजन को नियंत्रित रखने, उचित खानपान, स्वास्थ्य जीवन शैली एवं टीवी लैपटॉप और मोबाइल का सीमित इस्तेमाल की में सबसे महत्वपूर्ण है एजुकेशन.