पटना में 1621 में हुआ था पहला क्रिसमस मिलन

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राजधानी मे पहली बार 1621 में क्रिसमस मिलन समारोह का आयोजन किया गया था। उसी समय से ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार प्रदेश मे प्रारंभ हुआ लेकिन मात्र एक वर्ष में ही मिशन के लोगो ने पटना में कार्य बन्द कर दिया। हालांकि इसाई धर्म के प्रचारकों का पटना में आना-जाना लगा रहा।

स्थायी रुप से मिशन के लोगों ने 1713 में पटना को केन्द्र बनाया। उस वर्ष पटना सिटी में पादरी की हवेली में छोटे से गिरजाघर का निर्माण किया गया। उस समय फादर फेलिक्स देखभाल कर रहे थे।

1734 में फादर जोआकीम को पटना का केन्द्र का प्रभारी बनाया गया। 1739 में फादर जोसेफ एक कुशल चिकित्सक के रुप में पटना पहुँचे। उनकी चर्चा धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में पहुँच गयी। उस समय बेतिया में राजा ध्रुव नारायण सिंह राज्य कर रहे थे। उन्होंने अपने किसी परिजन के ईलाज के लिये फादर को आमंत्रित किया और परिजन ठीक हो गया। उन्होंने मरीच के ठीक होने पर राज्य में इसाई धर्म के प्रचार की इजाजत दे दी।

पादरी की हवेली में वर्तमान में जो गिरजाघर खड़ा है, उसका निर्माण 1773 में की गयी थी।

बेतिया में बना था राज्य का दूसरा चर्च

पटना के बाद बेतिया में सूबे में दूसरा cचर्च बनाया गया था। वहाँ पर 1745 में cचर्च का निर्माण किया। इसका श्रेय फादर जोसेफ मेरी को जाता है। उस समय चर्च महल का निर्माण राजमहल के aबगल में ही किया गया था।

1853 में बना बांकीपुर चर्च

राजधानी में बांकीपुर चर्च की स्थापना 1853 में की गई थी। यह एक c कान्वेंट चर्च था। लेकिन 1928 में इस चर्च को सभी के लिये सार्वजनिक कर दिया गया।

सबसे बड़ा चर्च कुर्जी में

कुर्जी में 1858 में पहली बार चर्च बनाया गया था। पहली बार संत माईकल हाईस्कूल के परिसर में चर्च बनाया गया, लेकिन आसपास के ईलाके में ईसाईयों की आबादी बढ़ने के कारण चर्च cछोटा पड़ने लगा तो स्कूल के बाहरी परिसर में बड़ा चर्च का निर्माण किया गया।

1919 में बना था पटना धर्म प्रांत

10 सितम्बर 1919 को संत पिता बेनेदिक्त ने पटना को धर्म प्रांत घोषित किया था। इस धर्म प्रांत के संचालन का भार येसु समाज को सौंपा गया।

 साभार: पटना जागरण सिटी