पति के दीर्घायु के लिए वट सावित्री पूजा की धूम

745
0
SHARE

पटना/ संवाददाता-

आज वट सावित्री व्रत है, आज के दिन पुरे बिहार सहित पुरे उत्तर भारत में सुहागिन श्रृंगार कर के बरगद पेड़ के चारों तरफ 108 बार फेरें लगाती हैं और अपने पति की दीर्घायु होने के लिए पूजा-प्रार्थना करती हैं। यह पर्व प्यार, श्रधा और पवित्र प्रेम का पर्व है। बरगद के पेड़ की पूजा करने से अखंड सौभाग्यवती रहने का आशीष प्राप्त होता है। इस पर्व के करने की मान्यता है की इसी दिन माता सावित्री ने यमराज के चंगुल से अपने पति राजा सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। हिन्दू धर्म में वट सावित्री पूजा स्त्रियों का पवित्र पर्व है। जिसे करने से स्त्री अखंड सौभाग्यवती रहती है। कथाओं के मान्यता है की जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे तो सावित्री भी पीछे पीछे चलने लगी। यमराज सावित्री को पीछे चलने से मना करते रहे लेकिन सावित्री नहीं मानी। अंत में यमराज पीछा छुड़ाने के लिए सावित्री को तीन वरदान देने का वादा करते हैं। जैसे ही यमराज ने कहा कि जो मांगना है मांग लो मगर वापस चली जाओ। तत्पश्चात सावित्री ने तुरंत पहला वरदान सौ पुत्र की माता बनने की मांग बैठी। यमराज ने कहा ऐसा ही होगा। इसके बाद सावित्री ने कहा कि मैं पतिव्रता नारी हूं और बिना पति के संतान सम्भव नहीं है। माता सावित्री की बात सुन कर यमराज को भूल का अहसास हुआ और सत्यवान के प्राण वापस करने का वरदान दे दिया। इसके बाद यमराज ने चने के रूप में सत्यवान को सौंप दिया। सावित्री ने चने को सत्यवान के मुंह में दे दिया और सत्यवान जीवित हो गया । उसी दिन से सावित्री पूजा होने लगी। सावित्री ने उस वट वृक्ष को भी आभार प्रकट किया जिस वट वृक्ष के निचे सत्यवान मृत लेटा हुआ था और उस वट वृक्ष को पूजा कर 108 बार फेरे लगाई।