पांच साल बाद मकर संक्रांति पर आया शुभ संयोग

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पटना: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व पूरे भारत में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तब इस संक्रांति को मनाया जाता है। यह त्यौहार अधिकतर जनवरी माह की चौदह तारीख को मनाया जाता है।

इस बार भी मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी के दिन शनिवार को मनाया जाएगा। वह भी सायंकाल में। पांच साल बाद मकर संक्रांति का ऐसा योग आया है। आचार्य कृष्णानंद पौराणिक ने बताया कि 2013 में मकर संक्रांति का इस तरह का योग आया था। उस समय भी दिन के दो बजे से मकर संक्रांति का पुण्यकाल प्रारंभ हुआ था। इस साल भी वैसा ही योग बन रहा है।

आचार्य पौराणिक जी ने बताया कि इस साल 14 जनवरी दिन शनिवार को दोपहर बाद 1.56 बजे से मकर संक्रांति का पुण्यकाल प्रारंभ हो रहा है तथा शाम 5.17 बजे तक पुण्यकाल रहेगा। यानि मात्र तीन घंटा उन्नीस मिनट ही संक्रांतिजन्य पुण्यकाल रहेगा। बताया कि इस अवधि के मध्य ही स्नान-दान समेत अन्य कार्य करना श्रेयस्कर होगा।

मकर संक्रांति की तैयारी में लोग जोरशोर से जुट गये हैं। अभी से चूड़ा-दही की व्यवस्था में लोग लग गये हैं। वहीं मकर संक्रांति को ले बाजारों में चहल-पहल भी बढ़ गई है। चौक-चौराहों पर नई-नई दुकानें भी सज गई है।

कहा जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाया करते हैं। शनिदेव चूंकि मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा उनसे मिली थीं। यह भी कहा जाता है कि गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।

महाभारत काल के महान योद्धा भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था।