पानी की किल्लत से जूझते ग्रामीण, 200 घरों पर एक मात्र चपाकल

925
0
SHARE

रोहतास/ संवाददाता-

कहा जाता है की आने वाले दिनो में दुनिया में सबसे अधिक लड़ाईयां पानी के लिय ही होगी और यह अब सच भी साबित हो रहा है। रोहतास जिले के ग्रामीण क्षेत्र में कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों देखने को मिल रहा है। यहां अभी से ही ये नजारे दिखने लगी है। सासाराम के सदर प्रखण्ड के मडनपुर (मरनपुर) गांव की भी कमोबेस यही स्थिति हो गयी है। 200 घरों वाले इस गांव में मात्र एक चापाकल है। जिसके भरोसे पूरा मडनपुर गांव है। यहां पानी के लिय प्रतिदिन लड़ाई-झगड़ा होते रहता है। अप्रैल के महीना में ही चल रहे लू के थपेड़ो ने मौसम का मिजाज गर्म क्या किया ? धरती के भी पानी सूखने लगे। आलम ये है की भूजल स्तर गिरने के कारण सासाराम में ज्यादातर चापाकल सूखने लगे हैं। जिला मुख्यालय से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित मडनपुर गांव में पानी के लिय लोग मारामारी करते हैं। सुबह से ही लाईन लगाके गां‌व के लोग अपने डीब्बा, बर्तन लेकर खड़े हो जाते हैं। पानी की समस्या ऐसी की गांव में लोगों के बीच अब पानी के लिय आपसी सौहार्द भी बिगड़ने लगे हैं। इल भीषण गर्मी में भी पानी की किल्लत से लोग रोज-रोज स्नान भी नहीं कर पा रहे हैं। महिलायें कहती हैं की चार-चार दिन हो जाते हैं तब जा कर लोग स्नान करते हैं। जिससे बीमारियां भी दस्तक देने लगी है। मडनपुर (मरनपुर) महादलितों की बस्ती है, यहां के ज्यादातन लोग सासाराम में मजदूरी करते हैं। पानी की किल्लत हर साल यूंही मुंह बाये खड़ा रहती है। लेकिन तराबट है की मिटती ही नहीं। जिला प्रशासन के सामने पानी की समस्या शुरसा की तरह मुँह बाँये खडी हैं। गर्मी की तपिस बढते ही पानी को लेकर प्रशासन पानी पानी हो जाता हैं। खासकर पहाडी क्षेत्रो में भूजल स्तर जल्दी खिसकती है। रोहतास के डीडीसी हासिम खाँ की माने तो 13वें बित्त आयोग के योजनाओ के तहत प्रत्येक पंचायत को 13 —13 लाख रूपये की राशि दी गयी हैं , जिसमें प्राथमिकता के आधार पर पेयजल की समस्यादूर करने की कोशिश की जा रही हैं। खासकर डीप बोरिंग तथा सोलर सिस्टम से पानी की समस्या पर काम किया जा रहा हैं।