पितरों को मोक्ष दिलाने मोक्षधाम में उमड़े पिंडदानी

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गया: मोक्षधाम गया जी में पिंडदान करने का धार्मिक महत्व है। कहते हैं यहां पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पिडदान के दूसरे दिन शनिवार को प्रेतशिला में पिडदान और पहाडी के तलहटी के रामकुंड में तर्पण करने का विधान है। गया में सुबह से हो रही हल्की बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में लोगों ने पिंडदान किया।

गयाधाम में देश के विभिन्न प्रांतों से करीब 60 हजार तीर्थयात्री आ चुके हैं। पिंडदानियों का आना जारी है। त्रिपाक्षिक गयाश्राद्ध करने वाले गहरी आस्था के साथ दूसरे दिन का कर्मकांड किया।

पिंडदान निमित पंडितों द्वारा किए जा रहे वैदिक मंत्रोच्चार से विष्णुनगरी गुंजायमान है। कर्मकांड को लेकर गयापाल पंडे से लेकर ब्राह्मण तक व्यस्त हो गए हैं। चांदचौरा से लेकर अंदर गया की गलियों की रौनक देखते बन रही है। अगले एक-दो दिनों में मेला क्षेत्र की रौनक परवान पर होगी।

अहले सुबह पांच बजे से ही पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष दिलाने के लिए तीर्थयात्रियों का जत्था अंतसलिला में पहुंचने लगा। सुबह छह बजते-बजते विष्णुपद मंदिर, देवघाट, संगत घाट, गजाधर से लेकर फल्गु नदी कर्मकांडियों से पट गयी। इस बार फल्गु में अच्छा पानी होने से पिंडदानियों को स्नान और तर्पण में काफी सहूलियत हुई।

कर्मकांडियों ने पवित्र फल्गु में तर्पण कर पूर्वजों को नमन करते हुए उनके ब्रह्मलोक की कामना की। देवघाट के नीचे के अलाव कुछ दूर पानी के बाद फल्गु की रेत पर बैठकर पिंडदानियों ने कर्मकांड किया। बीच में बह रही फल्गु की धारा में स्नान करने के बाद नदी और घाटों पर पिंडदानियों ने तर्पण कर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और स्वर्गलोक की प्राप्ति की कामना की। फल्गु में कर्मकांड के बाद तीर्थयात्री विष्णुपद मंदिर पहुंचे। यहां गर्भगृह में विष्णुपद की पूजा-अर्चना की।