पीरदमड़िया मस्जिद… स्थापत्य कला की मिसाल

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मुगल बादशाह जहांगीर के समय बनी थी यह मस्जिद

गंगा तट पर स्थित मुगलकालीन पीरदमड़िया मस्जिद स्थापत्य की नायाब मिसाल है। लगभग छ्ह सौ साल पुरानी इस मस्जिद के परिसर मे पीरदमड़िया बाबा, उनके परिवार और अनुयायियों की मज़ारें हैं। यहां हर वर्ष इस्लामी महीने बरफात की कीडामकोडा की कीडामकोडा की 25 तारीख को उर्स लगता है। इस मस्जिद के बारे मे चर्चित कहानी है कि इसके निर्माण के समय इसका गुम्बद बार- बार गिर जाता था। इसके बाद एक पीर ने चालीस दिनों तक एक पैर पे खड़े होकर इबादत की तब जाकर गुम्बद का काम पुरा हुआ। वह सूफी दान मे एक दमड़ी (पैसा) ही लिया करते थे। इस लिए वह पीर दमड़िया बाबा के नाम से प्रसिध्द हुए। इस मस्जिद के खनकाह के बारे मे मान्यता है कि मुगल बादशाह जहांगीर के समय बनाया गया था। मस्जिद तीन बड़े अर्ध्द गोलाकार पर आधारित है। चारों ओर मध्य गुम्बद जैसी मीनारें हैं, यह मीनारें मेहराबदार गोल पायों पर टिकी हैं। एक मीनार मे आठ गोलकार पाये हैं।

Source: Dainik Bhaskar