पुण्यतिथि पर याद किये गए ‘बिहार केसरी’

889
0
SHARE

सुप्रिया सिन्हा

पटना- कृष्ण सिंह बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री थे. इन्हें बिहार केसरी के नाम से भी जाना जाता है. ये 1946 से 1961 तक मुख्यमंत्री रहे. बिहार भारत का पहला राज्य था जहाँ सबसे पहले उनके नेतृत्व में जमींदारी प्रथा का उन्मूलन उनके ही शासनकाल में हुआ. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद तथा अनुग्रह नारायण सिन्हा के साथ वे भी आधुनिक बिहार के निर्माता जाने जाते हैं.

कृष्ण सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1887 को मुंगेर जिला के एक साधारण भूमिहार परिवार में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव से की. उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से एम.ए.करने के पश्चात मुंगेर में वकालत शुरू किया. वे एक ओजस्वी अधिवक्ता थे. महात्मा गांघी से व्यक्तिगत मुलाक़ात के बाद वे 1911 में गांधीवाद विचारधारा से प्रभावित होकर उनके अनुयायी बन गए. वे 1937 में केन्द्रीय असेम्बली और बिहार असेम्बली के सदस्य चुने गए. 1937 के प्रथम कांग्रेस मंत्रिमंडल में कृष्ण सिंह बिहार के मुख्यमंत्री बने. 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध आरम्भ होने पर मंत्रिमंडल में त्याग पत्र दिया. 1946 में वे फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने और 1961 तक रहे. वे दो बार जेल भी गए. एक बार साइमन कमीशन के बहिष्कार तथा दूसरी बार नमक सत्याग्रह में भाग लेने पर जेल गए.

कृष्ण सिंह के कार्यकाल में बिहार में अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए. वे जाति-पाती के खिलाफ थे. उन्होंने बिहार से जमींदारी प्रथा को समाप्त किया. सिंदरी खाद कारखाना, बरौनी का तेल शोधक कारखाना, मोकामा में गंगा पर पुल का निर्माण उल्लेखनीय है. देवघर के बाबा वैद्यनाथ मंदिर में दलित जातियों को प्रवेश उन्होंने ही दिलाया. दुनिया में उस दौरान सबसे बड़े एडमिनिस्ट्रेशन एक्सपर्ट माने जाने वाले एपेल्वी को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने खासकर राज्य सरकार के कार्यकलापों का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के लिए बुलाया था. जिसमें एपेल्वी ने बिहार को सर्वश्रेष्ठ प्रशासित राज्य घोषित किया था. 31 जनवरी 1961 में बिहार में कृष्ण सिंह की मृत्यु हो गयी.