पुरस्कार के बदले मिला निलंबन पत्र

552
0
SHARE

गया- 19 जनवरी को बोधगया के महाबोधि मंदिर के गेट संख्या 4 पर रखे गए बम को देख अपने हाथों से उठाकर रखने वाले जवान को वरीय पुलिस अधिकारी ने निलंबित कर दिया है। बीएमपी का जवान बताता है कि उसे जब वह बम मिला था तो वह इस खतरे से अंजान था और बैग में रखे लावारिस बम को हाथों से उठा कर अपने अधिकारियों के पास लेकर गया था और इन्हीं जवानो के द्वारा पुलिस अधिकारियों तक यह जानकारी मिली थी। उसके बाद जिला पुलिस के वरीय अधिकारियों के देख-रेख में सुरक्षा के दृष्टिकोण से उसे फल्गु नदी में दबाकर रखा गया था। जिसे 21 जनवरी की शाम को ब्लास्ट कर नष्ट किया गया था। ज्ञात हो कि इस तरह का पहला बम था जिसकी संरचना इतना जटिल था कि बिना ब्लास्ट के इसे डिफ्यूज भी नहीं किया जा सकता था। जिसे nsg के बम निरोधक दस्ता की टीम ने ब्लास्ट कर डिफ्यूज किया था।

जब ये दोनों बीएमपी जवान उपेंद्र कुमार रॉय और गणेश उरांव ने लावारिस बम के थैले को उठाया था उस वक़्त उसे भी लगा था उसे इस कार्य और तत्परता के लिए पुरस्कृत किया जाएगा लेकिन कुछ ही दिनों के बाद इन दोनों जवानो से ड्यूटी में लापरवाही और कार्य मे कोताही बरतने को लेकर गया एसएसपी द्वारा स्पष्टीकरण मांगा गया। जिसका जबाब भी पत्र के माध्यम से दोनो जवानों ने दिया फिर अचानक निलंबन की सूचना मिली जिससे दोनों के होश उड़ गए।

दोनों बीएमपी जवान आज तक एक पटना के पूर्व डीजीपी आवास पर उपेंद्र कुमार रॉय तो दूसरा महाबोधि मंदिर में ड्यूटी पर तैनात। निलंबित हुए जवानो ने बताया की जहां से बम बरामद हुआ और जहां दूसरी जगह तिब्बत मन्दिर के पास से जो बम बरामद हुया वहां जिला पुलिस बल के जवान तैनात थे लेकिन सिर्फ हमे ही निलंबित किया गया है। वहीं बीएमपी के समादेशक ने बताया दोनो जवान ने जो बम उठाया था वहीं गलत किया नहीं करनी चाहिए थी।