पुलिस की बर्बरता

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छपरा – तीन दिनों से अनशन पर बैठे आम आदमी पार्टी के नेता उमेश्वर सिंह मुनि ने जिला प्रशासन के ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए अपनी पाँच सूत्री मांगों को लेकर नगरपालिका चौक पर बैठे थे| लेकिन जिलाप्रशासन की नींद नहीं टूटी तभी कल शुक्रवार को एक सामाजिक कार्यकर्ता डॉ अनिल कुमार की हत्या गला रेत कर अपराधियो ने घर में घुस कर दिया 24 घंटे बीतने के बाद भी अपराधी नही पकड़ाया तो जिससे नराज लोगो ने आम आदमी पार्टी के समर्थन से नगरपालिका चौक को जाम कर दिया| जिस कारण नगरपालिका चौक थाना चौक तक जाम लग गया तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी| कच्ची नींद से जागे प्रशासन ने लोगों को समझने के बजाये उनको जबरन जाम हटाने का प्रयास किया जिससे लोगो में आक्रोश बढ़ गया है और जम कर नारेबाजी करते हुए प्रशासन से सीधी टक्कर हो गई जिसमें पुलिस प्रशासन ने लोगो पर अपनी बर्बरता इस कदर दिखाने लगे की उनको इतना भी होश नहीं रहा कि समर्थन अपने हाथ में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लिए है उसे भी अपमान करने में थोड़ा भी संकोच नही किये झंडे को नोचते पुलिस कर्मी ने समर्थको को मारते पीटते हुये गिरफ्तार कर जेल ले गये|

इस प्रकार की कार्रवाई से सारण पुलिस पर कई सवाल खड़े करता है| डाक्टर की मौत पर तत्परता दिखाई होती तो अपराधी सलाखो के पीछे होता, झण्डा लिए व्यक्ति के हाथ से झण्डा छीनना, क्या समझा जाए इसे? क्या झण्डा लेकर आंदोलन करना अपराध है? आखिर झण्डे को लोगो के हाथों से छीनने की वजह क्या थी?