पूर्वोत्तर राज्यों से संबंधित कृषि एवं मनरेगा के बीच समन्वय हेतु नीतिगत पहल के लिए क्षेत्रीय कर्मशाला का किया गया आयोजन

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आज कृषि एवं महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना (मनरेगा) के बीच समन्वय स्थापित करने हेतु नीतिगत पहल के लिए पूर्वोंत्तर राज्यों के लिए क्षेत्रीय कर्मशाला का आयोजन बामेती, पटना के सभागार में किया गया। इस कर्मशाला का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री, बिहार सुशील कुमार मोदी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय मंत्री, कृषि विभाग, बिहार डाॅ॰ प्रेम कुमार ने किया। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में प्रति वर्ग किलोमीटर 1013 व्यक्ति घनत्व है। इस तरह भूमि पर आबादी का दवाब है। राज्य में खेती योग्य औसत रकवा 0.64 हेक्टेयर है। राज्य के 91 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी में आते हैं और इस श्रेणी में खेती योग्य औसत रकवा 0.25 हेक्टेयर है। मनरेगा का पूरा नाम महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना है, यानि मजदूरों को रोजगार की गारंटी देकर किसानों के आय को कैसे बढ़ाया जा सकता, इस पर हमें विचार करना होगा। मनरेगा के अवयवों का सदुपयोग कृषि में करके किसानों की आय को बढ़ाया जा सकता है। मनरेगा की योजनाओं में आमलोग विशेष कर किसानों में जागरूकता का अभाव है। मनरेगा में बहुत सारी योजनाओं का लाभ कृषि को मिल सकता है। इसलिए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है। इस वर्ष मनरेगा के माध्यम से वन महोत्सव में निर्धारित समय सीमा के अंदर 50 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, किसानों की रखवाली करने के लिए अलग से राशि की व्यवस्था की गई है। राज्य में कृषि के लिए अलग से बिजली फीडर का कार्य किया जा रहा है, मार्च, 2019 तक सभी किसानों को सिंचाई हेतु बिजली उपलब्ध कराना सरकार का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है आज के कार्यशाला से नीतिगत पहल हेतु आवश्यक सुझाव प्राप्त हो सकेंगे।

कृषि मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय कोे दोगुनी करने में मदद करने के लिए कृषि और मनरेगा के बीच नीतिगत पहल हेतु माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी द्वारा 7 राज्यों के मुख्यमंत्री तथा नीति आयोग के सदस्य (कृषि) की एक उपसमिति बनाया गया है। इस उपसमिति में माननीय मुख्यमंत्री, बिहार श्री नीतीश कुमार भी एक सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि गठित उप समिति द्वारा कृषि एवं मनरेगा में बेहतर समन्वय तथा मनरेगा के निर्धारित अवयवों का उपयोग कृषि मौसम में करने के लिए प्रमुख विषय जो विचारनीय है, उनमें मुख्य रूप से राज्य विशेष के अनुसार फसल बोआई के पूर्व तथा फसल कटाई के बाद किसानों की आय में सुधार, जल संरक्षण तथा धन के अपशिष्ट पर जोर देने हेतु सुझाव प्राप्त करना, किसानों की आय को बढ़ाने के लिए मनरेगा के तहत किये जा रहे कार्यों को रेखांकित करना, जिसमें जल संरक्षण, व्यक्तिगत लाभुक योजनाओं, ग्रामीण हाट का निर्माण तथा वर्मी कम्पोस्ट आदि पर बल देना, कृषि में संकट जैसे कार्य की उपलब्धता, मजदूरी तथा मौसम आदि जैसे समस्याओं में मनरेगा हस्तक्षेप पर अनुशंसा, छोटे और सीमांत किसानों विशेषकर अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के किसानों की आजीविका के लिए मनरेगा के कार्यक्रमों में सुधार आदि प्रमुख है। माननीय मंत्री ने कहा कि इसी परिपेक्ष्य में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में मनरेगा की भूमिका पर 3 जुलाई, 2018 को राज्य के सभी जिलों के आमंत्रित किसानों से सुझाव प्राप्त करने के लिए लोक संवाद, एक अणे मार्ग में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कर्मशाला में आमंत्रित किसानों ने महत्त्वपूर्ण एवं उपयोगी सुझाव दिये, साथ ही अनेको किसानों ने अपने लिखित सुझाव विभाग को उपलब्ध कराये।

उन्होंने कहा कि बिहार की लगभग 76 प्रतिशत आबादी के कृषि पर निर्भर है। राज्य में 90 प्रतिशत जोत, सीमांत एवं लघु किसान के पास है। राज्य में कृषि एवं इससे संबद्ध कार्याें में लगभग 3 करोड़ मजदूर कार्य कर रहे है। हम सभी इस बात से अवगत है कि माॅनसून मौसम में मनरेगा का कार्य नहीं किया जाता है। अतः माननीय प्रधानमंत्री जी के पहल पर मनरेगा के अवयवों को कृषि कार्यों से जोड़ कर अतिरिक्त कार्य दिवस का सृजन करते हुए कृषि के लिए आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किसानों की आय दुगूनी करनी में मदद मिलेगी। राज्य सरकार ने इस दिशा में पहल करते हुए तालाबों की खुदाई तथा जीर्णोंद्धार में मनरेगा के कार्यक्रमों में प्राथमिकता दी है। मैं इस क्षेत्रीय कर्मशाला में नीति आयोग, भारत सरकार के कृषि एवं ग्रामीण विकास के पदाधिकारियों, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखण्ड एवं बिहार के पदाधिकारियों और अन्नदाता किसान भाई एवं बहनों का हार्दिक अभिनन्दन करता हुँ। मुझे उम्मीद है इस कर्मशाला में माननीय प्रधानमंत्री जी के पहल पर उप समिति विचारर्थ विषयों पर वृहत्त परिचर्चा के परिणाम से कृषि एवं मनरेगा के बीच नीतिगत समन्वय सुनिश्चित करने में सहयोग प्रदान करेगा।

प्रो॰ रमेश चन्द, सदस्य, नीति आयोग, भारत सरकार ने कहा कि मनरेगा में 100 दिनों की मजदूरी की गारन्टी को बढ़ाते हुए सालों भर रोजगार गारन्टी के लिए इस उप समिति का गठन किया गया है। यह उप समिति भारत सरकार के समक्ष इस रिपोर्ट को पेश करेगी, जिसमें कृषि एवं संबद्ध विभागों और मनरेगा के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य दिवस बढ़ाते हुए कम लागत से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए विभिन्न फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय पर गठित उपसमिति आगामी 31 अगस्त को दिल्ली में पुनः बैठक होगी, जिसमें समिति के निर्णयों का ड्राफ्ट तैयार किया जायेगा, जिसके आधार पर समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट नीति आयोग को प्रस्तुत करेगी।

एस॰ के॰ पटनायक, सचिव, कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार ने कहा कि मनरेगा के 360 गतिविधियों में कृषि के कार्यों के करने की सुविधा है तथा मनरेगा के 130 अवयव कृषि से सीधे जुड़े हुए हैं। मनरेगा एवं कृषि में जल संरक्षण, मछलीपालन एवं वर्मी कम्पोस्ट इत्यादि अवयवों पर कार्य करने से कृषि पर विविधीकरण बढ़ेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि मनरेगा और कृषि के समन्वय से 5000 चिह्नित ग्रामीण हाटों के आधारभूत संरचना का विकास किया जा रहा है।

शशि शेखर शर्मा, विकास आयुक्त, बिहार ने कहा कि मनरेगा की नीधि को इस प्रकार व्यय किया जाय, जिससे प्रतिफल प्राप्त हो सके। बिहार के सबसे पुराने सोन नहर प्रणाली में सालोंसाल क्षरण होता जा रहा है। जिससे इसके पानी को अंतिम छोर तक उपयोग नहीं हो पा रहा है। इससे निकलने वाले आहर और पईन की स्थिति बहुत खराब है। उन्होंने सुझाव दिया कि मनरेगा के संसाधनों को उपयोग सोन नहर प्रणाली के जीर्णोद्धार करने से कैचमेंट क्षेत्र में पड़ने वाले खेतों की स्थिति को लाभ होगा। मनरेगा को कृषि से जोड़ने पर किसानों की आय में वृद्धि होगी और मनरेगा के संसाधनों का सदुपयोग हो सकेगा।

संजीव कुमार, अपर सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, भारत सरकार ने मनरेगा और कृषि के बीच बेहतर समन्वय हेतु एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें मुख्य रूप से मनरेगा के कार्यों जैसे सरकारी, निजी भूमि, स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी तथा आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत 235 करोड़ मानव दिवस प्रति वर्ष का सृजन किया गया है। मजदूरों के भुगतान में पारदर्शिता बरतने के लिए इसरो की सहायता से जियो टैगिंग की गई है तथा 97 प्रतिशत भुगतान मजदूरों के खातों में सीधे डी॰बी॰टी॰ के माध्यम से किया जाता है। ग्रामीण विकास विभाग, भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट आॅफ इकोनाॅमिक ग्रोथ से मनरेगा का अध्ययन कराया गया जिसमें यह पाया गया कि मनरेगा के कार्यक्रमों से कृषि क्षेत्र का रकवा बढ़ा है। खाद्यान्न फसलों के उत्पादकता, चारा फसलों का उत्पादन बढ़ा है तथा किसानों की आय बढ़ी है। किसानों की आय दोगुना करने के लिए मुख्य रूप से 9 क्षेत्रों पर विशेष बल दिया जा रहा है। ये क्षेत्र हैं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, आधारभूत संरचना पर बल, स्वस्थ क्रेडिट परिस्थिति तैयार करना, अनुसंधान एवं विकास खासकर प्रसार तंत्र, जोखिम प्रबंधन, विपणन रणनीति, गैर-कृषि/आॅफ फार्म/मजदूरी तथा पर्णधारियों के बीच भागीदारी को और मजबूत करना है।

इस क्षेत्रीय कार्यशाला में कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार, ग्रामीण विकास विभाग, नीति आयोग के सलाहकार डाॅ॰ जे॰पी॰ मिश्रा, पश्चिम बंगाल के कृषि निदेशक एस॰के॰ पात्रा, झारखंड के कृषि निदेशक रमेश गोलाप, उड़ीसा के कृषि निदेशक डाॅ॰ एम॰ मुथु कुमार, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार के सचिव अरविन्द कुमार चैधरी, जीविका, बिहार के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बालामुरूगन डी॰, कृषि निदेशक, बिहार आदेश तितरमारे सहित झारखण्ड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल तथा बिहार के कृषि एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरीय पदाधिकारी एवं चयनित किसानगण भाग लिये।