पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव व वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के बंगला विवाद में आया नया टर्न

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पटना – बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव का बंगला विवाद गरमाया हुआ है। इस बीच उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने तेजस्वी यादव के नाम अलॉट बंगला खाली कर दिया है और सुशील मोदी अपने तत्कालीन नए अवास 25/A हार्डिंग रोड पर शिफ्ट हो गए हैं। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव व वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के बंगला विवाद में यह नया टर्न है।

तेजस्वी यादव अभी सुशील मोदी के नाम से अलॉट बंगले 5 देशरत्न मार्ग पर काबिज हैं तो वहीं सुशील मोदी मंगलवार तक तेजस्वी यादव के नाम पर अलॉट बंगले में थे जो आज वह खाली कर तत्कालीन दूसरे अस्थायी आवास 25/ A हार्डिग रोड में आज से रह रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश एपी शाही की खंडपीठ ने सोमवार को तेजस्वी यादव को 5 देशरत्न मार्ग स्थित बंगला खाली करने का आदेश दिया तो इसके तुरंत बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने 1 पोलो रोड का तेजस्वी के नाम अलॉट बंगला खाली कर दिया हैं। फिलहाल अब ये देखना है कि तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री के नाम से 5 देशरत्न मार्ग वाला सरकारी बंगला कब खाली करते हैं।

वहीं सुशील मोदी ने कहा कि मैंने यह तय किया था कि डबल बेंच का इंतजार करेंगे, डबल बेंच के फैसला आने के बाद हमलोगों ने मकान को खाली कर दिया है। तत्काल औपबंधिक रूप से एक चार कमरे का छोटा फ्लैट आवंटित किया गया ताकि समान वगैरह रख सके जबतक कि वो बंगला खाली नहीं होता है। मुझे लगा कि मैं अगर बंगला खाली नहीं करूंगा तो कहेंगे कि मोदी जी तो बंगले में रह रहे तो हम जाएं कैसे। इसलिए मैंने आज औपचारिक रूप से इस पूरे मकान की जो चाभी है वो भवन निर्माण के अधिकारियों को सौंपने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि मैं मीडिया के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष से आग्रह करूंगा कि इस मकान को प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनाये। अगले 5-7 दिनों में मकान से शिफ्ट कर देना चाहिए था। मकान की कमी नहीं है और पिताजी का भी मकान है, माता जी का मकान है। माता जी का तो 40-42 फ्लैट है। जिनके पास इतनी सम्पत्ति हो वह व्यक्ति भी एक मकान को लेकर आखिर इस मकान में क्या खास है? ये तो कोर्ट ने भी कह दिया कि राज्यसरकार का अधिकार है कि हम आपको मंत्री परिषद के जो मंत्रियों को दिया जाने वाला मकान है वो हम दे रहे हैं। उनको कोई भी मकान दिया जा सकता है। लेकिन कोई कहे इनको यही मकान मुझे मिलना चाहिए, ये ना तो नैतिक अधिकार है न संवैधानिक अधिकार है।