प्रमण्डलस्तरीय खरीफ कर्मशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

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पटना- कृषि मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने दूरभाष पर मगध प्रमण्डल के प्रमण्डलस्तरीय खरीफ कर्मशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दूसरी हरित क्रान्ति बिहार से ही आयेगी। उन्होंने बताया कि मगध प्रमण्डल के गया, जहानाबाद, नवादा को जैविक काॅरिडोर में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों/कर्मचारियों एवं किसानों के योगदान से ही बिहार को वर्ष 2012 में धान, 2013 में गेहूँ एवं 2017 में मक्का के लिए भारत सरकार द्वारा कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

उन्होंने एक बार फिर बिहार को कृषि कर्मण पुरस्कार पाने के लिए सभी पदाधिकारियों/कर्मचारियों एवं किसानों से मेहनत करने की अपील किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने एवं मुख्यमंत्री का सपना हर भारतीय की थाली में एक बिहारी व्यंजन को साकार किया जायेगा। इसके लिये सरकार द्वारा 12 विभागों के माध्यम से 1,54,000 करोड़ रुपये की लागत से तीसरे कृषि रोड मैप 2017-2022 क्रियान्वित किया जा रहा है।

राज्य के सभी 534 प्रखण्डों में किसान उत्पादक संघ का गठन किया जा रहा है। इनके गठन हो जाने से किसान सस्ते दर पर उपादान क्रय कर सकेंगे एवं उनकी लागत घटेगी, साथ ही वे कृषि यंत्र बैंक स्थापित कर अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकेंगे। किसानों को अपनी उपज को बेचने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को कार्यालयों का चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाने के लिये हर पंचायत में पंचायत कृषि कार्यालय खोला जायेगा। इस कार्यालय में किसान सलाहकार एवं कृषि समन्वयक रोस्टर के अनुसार रह कर किसानों की समस्याओं का निराकरण करेंगे तथा उन्हें विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाने का कार्य करेंगे।

मंत्री ने कहा कि विभाग के सभी पदाधिकारी एवं प्रसार कार्यकर्ता अपनी पूरी क्षमता एवं दृढ़ निश्चय के साथ किसानों के हित में कार्य करें तथा सर्वश्रेष्ठ उत्पादन के लिए विभागीय योजनाओं को ससमय क्रियान्वित करें। ज्ञातव्य हो कि आज सभी प्रमण्डलों मेें प्रमण्डलस्तरीय खरीफ कर्मशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रमण्डल के अधीन पड़ने वाले सभी जिलों के पदाधिकारी, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक, प्रसार कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

प्रमण्डल के अधीन जिलों में विगत तीन वर्षों के वर्षांपात के आँकड़ों के अनुसार खरीफ, 2018 की फसलवार रणनीति कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों के सहयोग से जिलावार तैयार किया गया है। इस रणनीति में प्रमुखता खरीफ मौसम में धान से संबंधित विभिन्न प्रकार के प्रत्यक्षण यथा श्री विधि, पैंडीट्राप्लांटर से धान की बुआई, जीरो टिलेज/सीड ड्रील मशीन द्वारा धान की खेती तथा धान के तनावरोधी प्रभेदों के लिए बीज की व्यवस्था एवं सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

धान के अतिरिक्त अंतर्वर्ती फसल प्रत्यक्षण (संकर मक्का, मूँग) तथा राई/सरसों का प्रत्यक्षण (मधुमक्खी पालन के साथ) पर विशेष बल दिया जा रहा है। इस वर्ष सोयाबीन उत्पादक जिलों में सोयाबीन फसल के क्षेत्र विस्तार हेतु राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन- तेलहन के अंतर्गत प्रत्यक्षण कार्यक्रम क्रियान्वित किये जायेंगे।