प्राचीन इतिहास की खोज

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काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान अब तक राज्य के चार हजार से अधिक स्थलों पर पुरातात्विक अन्वेषण करा चुका है। इस अन्वेषण की प्रक्रिया में राज्य के हर गांव को शामिल किया जा रहा है। यों तो देश और दुनिया के इतिहासविदों के लिए बिहार हमेशा से ही आकर्षण का केन्द्र रहा है लेकिन जल्द ही यह ऐतिहासिक कैनवास और भी बड़ा होने वाला है। इस पूरी प्रक्रिया से बहुत ही सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं इतने बड़े और व्यवस्थित पैमाने पर बिहार में होने वाला यह सर्वेक्षण अब तक देश के किसी भी राज्य में नहीं हुआ है। पुरातात्विक अन्वेषण पुरातात्विक उत्खनन से पहले की प्रक्रिया होती है। इसमें पुरातात्विक स्थलों की पहचान की जाती है। पहचान करने के बाद इसका डॉक्यूमेंटेशन किया जाता है। इतने बड़े पैमाने पर राज्य के पुरातात्विक स्थलों के डॉक्यूमेंटेशन का काम अब तक नहीं हुआ था। इससे पहले डी आर पाटिल ने पचास के दशक के पहले एनसिएंट रिमेन्स ऑफ बिहार में लगभग तीन सौ स्थलों के डॉक्यूमेंटेशन का काम किया था। इस पूरी प्रक्रिया में केवल नालंदा में ही 431 स्थलों पर पुरातात्विक अन्वेषण हुआ है।

राज्य के कुल 38 में से 25 जिलों के डॉक्यूमेंटेशन का काम पूरा कर लिया गया है। अब भी जहानाबाद, गया, आरा, शाहाबाद, सासाराम, रोहतास, मुजफ्फरपुर, लखीसराय, मुंगेर और जमुई में इस तरह का अन्वेषण चल रहा है।

सकारात्मक बात यह है कि पुरातात्विक अन्वेषण में प्राक् ऐतिहासिक काल से लेकर, बौद्ध सर्किट, जैन सर्किट और पाल वंश से लेकर विभिन्न ऐतिहासिक कालों के प्रमाण मिल रहे हैं। विभिन्न स्थानों के एनबीपीडब्ल्यू मृदभांड के आधार पर इसे बुद्ध काल से जोड़ा जा रहा है जो ईसा से छह सौ साल पहले की परंपरा है। वहीं शैल चित्र और दूसरे प्रमाणों के साथ कुछ स्थलों के तार प्राक् ऐतिहासिक काल से भी जुड़ रहे हैं।

बिहार में पुरातात्विक स्थलों की बड़ी श्रृंखला है। इनमें से बहुत से महत्वपूर्ण जगहों पर अभी उत्खनन नहीं हुआ है। इनके अन्वेषण और डॉक्यूमेंटेशन से विरासत की तलाश में नए संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं।

विजय कुमार चौधरी, बिहार विरासत समिति के कार्यकारी निदेशक और काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान के निदेशक

इसके पहले मध्यप्रदेश जैसे राज्य में भी बड़े पैमाने पर पुरातात्विक अन्वेषण हुए हैं। लेकिन बिहार का डॉक्यूमेंटेशन अधिक ऑर्गनाइज और शोधपरक है।

– अभिषेक सिंह अमर, सहायक प्रोफेसर, हैमिल्टन कॉलेज, न्यूयार्क

साभार: हिन्दुस्तान