फल बेचते-बेचते फिल्में बेचने लगे विजय सक्सेना

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मुंबई – फलों का कारोबार करते—करते अचानक फिल्मी दुनिया का हिस्सा बन जाना किसी ख्वाब के सच होने जैसा है। कारोबारी विजय सक्सेना को उम्मीद नहीं थी कि सिनेमा वालों को फल पहुंचाते—पहुंचाते अचानक वह लोगों को फिल्में भी पहुंचाने लगेंगे और वो भी अभिनेता, निर्माता और निर्देशक के रूप में। फिल्म टारगेट इंडिया बना चुके विजय सक्सेना की जर्नी हैरान कर देने वाली है कि किस तरह उन्होंने मुंबई में आई एक हॉलीवुड ​फिल्म की मेकिंग के दौरान निर्माता की आर्थिक सहायता कर फिल्म पूरी होने में मदद की। विदेशी निर्माता और उनकी टीम लंदन चली गई लेकिन उनसे वो रकम लेनी बाकी थी, जो उन्होंने फिल्म पूरी होने के लिए ली थी। गारंटी के तौर पर हॉलीवुड के निर्माता अपना कीमती कैमरा विजय सक्सेना के पास छोड़ गए थे।

विजय सक्सेना कहते हैं कि जब उन्होंने बकाया पैसों के लिए लंदन में निर्माता से संपर्क किया, तो उन्होंने रकम देने में असमर्थता जताई लेकिन उन्होंने लंदन आने का न्यौता दे दिया, जहां पहुंचकर विजय सक्सेना ने अपना एक प्रोडक्शन हाउस शुरू किया जिसका नाम है वीएसम्यूज़िक यूएसए। इस बैनर के तहत उन्होंने कई फिल्में बनाईं। फिर भारत लौट आए और यहां भी साईं नागराज फिल्म्स के नाम से प्रोडक्शन हाउस बनाया और एक के बाद एक 9 फिल्में बना डालीं। टारगेट इंडिया उनकी दसवीं फिल्म है जो देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत है।

बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी बीएसएफ किस तरह आतंकियों को देश में आने से रोकने के लिए प्रयासरत है, किस तरह उनके जवान खतरा उठाते हुए सीमाओं पर मुस्तैद हैं, उसे दिखाने के लिए निर्माता-निर्देशक विजय सक्सेना ने अपनी इस फिल्म में वास्तविक सेनाओं का ही सहारा लिया ताकि जनता के सामने तस्वीर साफ हो सके कि बीएसएफ के जवान किस तरह खतरा उठाकर देशवासियों की रक्षा कर रहे हैं जिसमें उन्हें दिल्ली पुलिस,एसएसबी, आमी एयरफोर्स और सीआरपीएफ का भी सहयोग मिला।

टारगेट इंडिया देश की पहली ऐसी फिल्म है जिसमें बीएसएफ, सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के असली जवानों को दिखाया गया है। इतना ही नहीं, फिल्म को पार्लियामेंट हाउस में भी शूटिंग करने की अनुमति दी गई क्योंकि फिल्म का मकसद पैसा कमाना नहीं, बल्कि देश की जनता को जागरूक करना है। विजय सक्सेना कहते हैं कि करीब 50 कलाकारों को लेकर बनाई जा रही मेरी फिल्म की शूटिंग दुबई, हांगकांग, बैंकाक, सींगापुर, चीन, मलेशिया, बंगलादेश, नेपाल आदि कुल 9 देशों में की गई है। खास बात ये है कि हमने सभी इंटरनेशनल बॉर्डर्स पर फिल्म के कई हिस्सों को शूट किया है।

फिल्म में चार फेस्टिवल्स भी देखने को मिलेंगे। आमतौर पर ऐसे त्यौहार ही आतंकियों के निशाने पर होते हैं। हमने ईद, छठ पूजा, गणपति पूजा और 26 जनवरी के दृश्य दिखाए हैं जब आतंकी हमला करने की कोशिश करते हैं। ये आतंकी कोई और नहीं, आईएसआईएस है, जो राष्ट्रपति तक यह संदेश पहुंचाता है कि आपके हिंदुस्तान में जितने भी जवान हैं, लगा लो लेकिन हम दिल्ली में तिरंगा नहीं, अपना झंडा लहराएंगे। निर्माता का कहना है कि फिल्म के जरिए हमारा मकसद सीमा सुरक्षा बल की ताकत दिखाना है, जो कितनी मुस्तैदी के साथ सीमाओं की सुरक्षा कर रही है।