फेसबुक पर अलख जगा रहे हैं संत ज़ेवियर कॉलेज के छात्र-छात्राएं

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एक छोटी सी बच्ची ‘अकेली’ (दैनिक भास्कर अखबार द्वारा दिया गया नाम) के जीवन को श्राप-मुक्त करने के लिए मुहिम चला रहे हैं संत ज़ेवियर कॉलेज और संत ज़ेवियर कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलोजी के विद्यार्थी। इसके लिए उन्होंने ‘सपोर्ट अकेली’ नामक एक फेसबुक पेज तैयार किया है जिसका लिंक है – https://www.facebook.com/fightforakeli/
शनिवार शाम छ: बजे जेपी गोलम्बर से गांधी मैदान तक कैंडल मार्च भी निकाला जाएगा जिसकी पूरी तैयारी चल रही है। विभिन्न शिक्षण संस्थानों और इच्छुक लोगों को इसमें शामिल होने के लिए अपील किया जा रहा है। इसके लिए सोशल मीडिया से इन्वाइट भेजे जा रहें हैं।
कैंडल मार्च के बाद हस्ताक्षर अभियान भी किया जाएगा जिन्हें एक ज्ञापन के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय में सोमवार को जमा किया जाएगा।

सपोर्ट अकेली फेसबुक वाल से —

‘अकेली’ कौन है?

‘अकेली’ महज़ समस्तीपुर की वो बारह साल की बच्ची नहीं है जो अपने बचपन में माँ बन गई है। ‘अकेली’ हर बच्ची है, हर लड़की है, हर औरत है। हमें इंसाफ चाहिए ‘अकेली’ के लिए जिसे शायद पता भी नहीं कि उसके साथ हुआ क्या और क्यूँ ! अपने सात माह के बच्चे का बोझ ये बच्ची कैसे उठाती है ? हमें न्याय चाहिए कि उस दरिंदे को सज़ा मिले जिसने ‘अकेली’ का ये हाल किया। उसे ज़िंदगी भर के लिए कभी ना भरने वाला घाव दिया। हम मरहम लगाना चाहते हैं उसके घावों पर, उसे बताना चाहते हैं कि उसकी गलती नहीं थी इसलिए उसे पूरा हक है जीवन जीने का। उसे पूरा हक है पढ़ने-लिखने का और खेलने-कूदने का। ना जाने कौन सी कुंठा में जी रही है वो ? पर ‘अकेली’ सिर्फ वही है क्या? ‘अकेली’ का चेहरा आपको हर जगह दिखेगा। हर उस बच्ची में, लड़की में और स्त्री में जो खुद को असुरक्षित महसूस करती है और उस मासूम में भी जो सुरक्षा-असुरक्षा का भेद जानने से पहले ही रौंद दी जाती है क्यूंकि ये दरीन्दे 2 साल की बच्ची को भी नहीं छोड़ते। हमारा आंदोलन सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि उस समाज के खिलाफ है जो ऐसे दरीन्दे पैदा करता है।