फ्रॉम कश्मीर विद लव

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सुप्रिया सिन्हा

पटना – धरती पर स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में लाखों पर्यटक हर साल घूमने और अपनी छुट्टियां बिताने जाते हैं लेकिन ठंड आने पर इसी स्वर्ग से कश्मीरी अपनी आजीविका के लिए बिहार आते हैं। वे लगभग 1,296 किमी की दूरी तय करके एक मक्सद के साथ आते हैं, वह है रोजगार।

मैट्रिक पास बेलाल अहमद (37) कश्मीर के रहने वाले हैं। वे हर साल ठंड में बिहार की राजधानी पटना आकर गर्म कपड़े बेचते हैं। वैसे तो कश्मीर में पूरे साल पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है लेकिन मौसम को देखते हुए घूमने का समय मार्च से अक्टूबर का है। ठंड में बर्फबारी होने के कारण कश्मीर की अर्थव्यवस्था भी ठंडी पड़ जाती है। यही वजह है कि बेलाल अपने साथियों के साथ बिहार में आकर तीन-चार महीने गर्म कपड़ों का व्यवसाय करते हैं।

बेलाल कहते हैं “मैं 20 साल से लगातार पटना आ रहा हूँ। यहाँ के लोग बेहद अच्छे हैं, यही कारण है कि कहीं और न जाकर मैं यहाँ व्यवसाय करता हूँ।” साथ ही वे कहते हैं ” यहाँ के ग्राहकों के साथ ऐसा रिश्ता बन गया है कि उनसे पैसे लेने की जल्दबाजी नहीं रहती। मौसम के अंत में सहूलियत के अनुसार पैसे ले जाता हूँ।”

बेलाल के परिवार में उनकी पत्नी, दो बच्चें और पिता हैं जिन्हें वह कश्मीर में छोड़कर पटना के सब्जीबाग मोहल्ले में किराए के घर पर तीन से चार महीने रहते हैं। यहाँ रिक्शे पर सवार होकर घर-घर जाकर कश्मीर की पश्मीना शॉल, कानी शॉल, स्टोल, लेडीज व जेन्ट्स जैकेट, मफलर और ऊनी सूट बेचते हैं।

“पश्मीना पर हाथों से बारीक कढ़ाई करके कानी शॉल बनाई जाती है। इसे बनाने में लगभग 5-6 महीने लगते हैं,” बेलाल ने बताया।

पटना के भूतनाथ रोड निवासी शशि सिन्हा कहती हैं “एक बार में पैसे नहीं देने की सुविधा के कारण मैं करीब 15-20 साल से इनसे खरीदारी कर रही हूँ। बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ती, घर बैठे ही मनपसंद रंग-बिरंगे शॉल और सभी गर्म कपड़े मिल जाते हैं।”

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