बगही धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा: मुख्यमंत्री

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पटना, 17 फरवरी 2017: मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज ब्रह्मलीन बाबा तपस्वी नारायण दास जी के जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित भव्य यज्ञ आयोजन के अवसर पर बगही धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुये कहा कि सीतामढ़ी जिला अवस्थित बगही धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा, इसके लिये अगर जरूरी निर्णय की आवश्यकता होगी तो यहां के लोगों से परामर्श कर आवश्यक निर्णय लिया जायेगा। यह क्षेत्र पर्यटन के दृष्टिकोण से आकर्षण का केन्द्र बनेगा। उन्होंने कहा कि परम पूज्य ब्रह्मलीन बाबा तपस्वी नारायण दास जी के जन्म शताब्दी के अवसर पर उपस्थित होकर मैं अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। जन्म शताब्दी समारोह के भव्य आयोजन के लिये उन्होंने आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यहां पर सरकार की ओर से जो भी व्यवस्था की गयी है, वह सरकार का कर्तव्य है और राज्य की जिम्मेवारी है। उन्होंने कहा कि इसी निवर्हन को हमलोगों ने 350वें प्रकाश पर्व के अवसर पर भी किया था। उन्होंने कहा कि श्री गुरू गोविंद सिंह जी महाराज का जन्म 350 साल पहले पटना में हुआ था। उन्होंने कहा कि यह हमारा कर्तव्य था कि आयोजन में कोई कमी न हो। पूरे देश एवं दुनिया में इस आयोजन से बिहार के प्रति अच्छी धारण बनी है। उन्होंने कहा कि अपने यहां ही कुछ लेाग ऐसे हैं जो बिहार की छवि को खराब करते रहते हैं। उन्होंने यज्ञ में आये साधु-संतों से कहा कि आप आशीर्वाद दें कि ऐसी मनोवृति वाले लोग ठीक हो जायें और बिहार गौरवान्वित हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रह्मलीन बाबा तपस्वी नारायण दास जी ने वर्षों तक तपस्या की। अन्न और पानी का परित्याग कर दिया सिर्फ गाय के दूध का सेवन करते थे। उन्होंने सीता राम जाप शुरू कराया, जो 57 वर्षों से निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि आज तो शुरूआत है और इतनी बड़ी सख्या में श्रद्धालू आयें हैं, अगले दस दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि आप सीता राम जाप जरूर करें, आपस में प्रेम एवं सद्भाव का वातावरण बना रहे, यही मेरी आपसे अपेक्षा है। झगड़ा विनाशकारी होता है। उन्होंने कहा कि सबके मन में शांति, प्रेम एवं सद्भाव का दीप प्रज्ज्वलित हो, प्रेम एवं सद्भाव का वातावरण बना रहेगा तो बिहार बहुत आगे जायेगा और हम बिहार के गौरवशाली अतीत को प्राप्त करने में सफल होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब महागठबंधन की सरकार बनी तो शराबबंदी का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि 9 जुलाई 2015 को पटना में श्रीकृष्ण मेमोरियल हाॅल में आयोजित महिलाओं के एक सम्मेलन में अपना भाषण समाप्त कर बैठा ही था कि पीछे से महिलाओं ने आवाज दी कि शराबबंदी लागू कीजिये। उन्होंने कहा कि मैं युवावस्था से ही शराब और नशा के खिलाफ रहा हूं। उन्होंने कहा कि उत्पाद एवं मद्य निषेध की बैठकों में मैंने कई बार कहा कि इस विभाग का नाम सिर्फ उत्पाद ही नहीं मद्य निषेध भी है और मद्य निषेध को प्रचारित करना चाहिये। उन्होंने कहा कि 2011 से प्रत्येक वर्ष 26 नवम्बर को मद्य निषेध दिवस आयोजित कराया जा रहा है। हमलोगों ने निर्णय लिया था कि जो गांव मद्य निषेध मुक्त हो जायेगा, उनको पुरस्कृत किया जायेगा। इसके बावजूद भी शराब की खपत बढ़ रही थी। जब चंद महिलाओं ने शराबबंदी की आवाज लगायी तो मेरे मन की दुविधा समाप्त हो गयी। मैंने पुनः माइक पर आकर कहा कि अगली बार सता में आऊंगा तो शराबबंदी लागू करूंगा। उन्होंने कहा कि समाज में तरह-तरह के लोग होते हैं। उन्होंने साधु-संतों से आह्वान किया कि ऐसे लोगों को दुरूस्त करने का आशीर्वाद दीजिये। उन्होंने कहा कि सिर्फ कानून से कामयाबी नहीं मिल सकती है। जन चेतना के लिये जबर्दस्त अभियान शराबबंदी एवं नशामुक्ति के पक्ष में शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी एवं नशामुक्ति के पक्ष में 21 जनवरी को पूरे बिहार में विशाल मानव श्रृंखला बनायी गयी। दो करोड़ लोगों के मानव श्रृंखला में शामिल होने का लक्ष्य था किन्तु चार करोड़ लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर बिहार के लोगों ने इतिहास रच डाला। जो रूट निर्धारित किया गया था, वह कम पड़ गया। एक कतार से काम नहीं चला तो दूसरे, तीसरे एवं चैथे कतार में लोग खड़े हो गये। यह शराबबंदी एवं नशामुक्ति के पक्ष में बिहार के लोगों का प्रकटीकरण था। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि इस बात पर नजर रखें कि शराब छोड़ने के बाद व्यक्ति कोई दूसरा मादक पदार्थ न लेने लगे। उसे प्रेम से समझाइये और न समझे तो उसे नशामुक्ति केन्द्र पर पहुंचा दीजिये। उन्होंने आह्वान किया कि इस व्यसन से, हृदय से मुक्ति पायें, फिर समाज को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के पूर्व लोग अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब में बर्बाद कर देते थे। चारो ओर कोलाहल और शाम होते ही झगड़ा-झंझट का माहौल होता था। शराब बंद हुआ तो शांति का वातावरण हो गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है और इसके लिये मेरी पूरी शुभकामना है। उन्होंने कहा कि यहां 1008 स्थल पर कीर्तन एवं 1008 स्थल पर हवन होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा भव्य आयोजन अद्भूत है और यह आपकी श्रद्धा का प्रतिफल है।

इसके पूर्व मुख्यमंत्री ने बगही धाम आकर शिव मंदिर का भ्रमण किया और ब्रह्मलीन बाबा तपस्वी नारायण दास जी के कुटिया में जाकर उनके चित्र पर माल्यार्पण किया एवं प्रसाद ग्रहण किया। बगही धाम पहुंचने पर मुख्यमंत्री को गार्ड आॅफ आॅनर दिया गया तथा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया।

कार्यक्रम को बाबा शुकदेव दास एवं बाबा रामाज्ञा दास ने भी संबोधित किया। विधान पार्षद श्री देवेश चन्द्र ठाकुर ने स्वागत भाषण किया। इस अवसर पर जल संसाधन तथा योजना एवं विकास मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बाबा रामानंद दास, श्री बृजनंदन दास, भारत भूषण दास, भरत दास, बड़ी संख्या में साधु-संत, नाम जापक, विभिन्न दलों के सम्मानित नेता, राजद के प्रदेश अध्यक्ष श्री रामचन्द्र पूर्वे, उनकी धर्मपत्नी, पूर्व सांसद श्री नवल किशोर राय, पूर्व सांसद श्री अर्जुन राय, पूर्व सांसद श्री सीताराम यादव, सीतामढ़ी के सांसद श्री रामकुमार कुशवाहा, विधायक श्रीमती रंजू गीता, विधायक श्री अमित कुमार टून्ना, विधायक श्री सुनील कुमार कुशवाहा, पूर्व विधायक श्रीमती नगीना देवी, जदयू, राजद एवं कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सहित विशाल संख्या में श्रद्धालूगण उपस्थित थे।