बचपना याद आई मोतिहारी जिलाधिकारी रमन कुमार को

496
0
SHARE

डर से नही मन से करे कार्य

मोतिहारी- बचपन की एक बात याद आती है। हमारे स्कूल में नए नए मास्टर जी आये थे और गणतंत्र दिवस के अवसर पर पहली बार परेड कराना चाहते थे। हेडमास्टर जी से अनुमति लेकर उन्होंने परेड का अभ्यास शुरू कराया। मास्टर साहब बच्चों के समूह से रोज परेड का अभ्यास कराते थे। ये बच्चे स्कूल के कोई आम बच्चे नहीं, बल्कि चुने हुए बच्चे होते थे। मास्टर जी बहुत मेहनत करते थे। एक-एक बच्चे के कदम ताल पर नज़र रखते थे। शुरू शुरू में बच्चों को कदम ताल करने में कठिनाई होती थी। लेकिन बच्चों को बहुत अभ्यास कराया जाता – समूह में और अकेले में भी। मास्टर जी के समर्पण एवं बच्चों के लगन से कदम ताल काफी बेहतर होने लगा था। अधिकांश बच्चे अब इसे मन से करने लगे थे। लेकिन कुछ बच्चे जो कदम ताल कर सकते थे, लेकिन जान बूझ कर नहीं करते थे, कदम ताल करने से उनको सख्त नफरत थी या शायद नए मास्टर जी के प्रयासों से उन्हें सख्त नफरत थी।

वे नहीं चाहते थे कि स्कूल में कुछ नया हो। ऐसे में कुछ और भी बच्चे कदम ताल कभी छोड़ देते और कभी डर से कर भी लेते। मास्टर जी हमेशा कहते – डर से नहीं, मन से कदम ताल करो। धीरे-धीरे बात बनने लगी। कदम ताल बहुत बेहतर होने लगा। लेकिन अब भी कुछ तो आदतन ठहरे। स्कूल में परेड पहली बार हो रहा था लेकिन पड़ोस के चाचा के घर पर टेलीविजन में कई साल से गणतंत्र दिवस परेड देखते रहे हैं कि परेड में अगर किसी एक ने भी कदम ताल नहीं मिलाया तो परेड देखने में बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। यही बात स्कूल के परेड में भी था। कुछ लोगों की शरारत से अधिकांश बच्चों की मेहनत पर पानी फर रहा था।

लेकिन मास्टर जी बड़े ही जिद्दी थे वैसे ही जैसे ये बच्चे। फिर क्या बहुत मौका देने के बाद भी जो बच्चे नही सुधरे उन्हें परेड से निकाल दिया। मास्टर जी को वो काम करने को मजबूर होना पड़ा जो वे बिल्कुल नही चाहते थे, क्योंकि परेड का समय नजदीक आ गया। अब अभ्यास के कुछ ही दिन शेष थे। परेड की लाइन थोड़ी छोटी हुई लेकिन अब परेड का कदम ताल बहुत अच्छा हो गया। बिल्कुल लाजवाब। फिर गणतंत्र दिवस भी आया, बहुत सुंदर परेड हुआ। पूरे जिले में गांव का और स्कूल का नाम हुआ। बच्चे आज भी उस परेड को याद करते हैं। सचमुच वो स्कूल का परेड मुझे आज भी याद है।