बच्चो में कुपोषण को कम करके रहेंगे : स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे

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पटना- राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, शिशु रोग विभाग, पी० एम ० सी एच एवं यूनिसेफ के द्वारा संयुक्त रूप से पोषण पर एक दिवसीय कार्यशाला ‘संवर्धन’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन स्वस्थ्य मंत्री, मंगल पाण्डेय के द्वारा संजय कुमार सिंह, अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, डा० सुरेन्द्र प्रसाद, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, बाल स्वास्थ्य, डा० ए ० के जायसवाल, विभागाध्यक्ष, शिशु रोग विभाग, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, डॉ अबनेर डेनिएल, पोषण विशेषज्ञ, यूनिसेफ इंडिया, डॉ शिवेंद्र पांडेया, कार्यक्रम प्रबंधक, यूनिसेफ बिहार,रवि० एन० पढ़ी, पोषण विशेषज्ञ, यूनिसेफ बिहार की उपस्थिति में दीप प्रज्‍जवलित करके किया गया।

कार्यशाला के दौरान बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा की कुपोषित बच्चे बड़े होकर अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाते है जिससे की राज्य और देश के विकास में अपना पूरा योगदान नहीं दे पाते है जिससे राज्य और देश के विकास पर असर पड़ता है। बचपन अच्छा होगा तभी आगे का जीवन अच्छा होगा। उन्होंने आगे कहा की एक स्वस्थ्य समाज ही स्वथ्य देश का निर्माण कर सकता है। बिहार विकास मिशन के अंतर्गत नियमित रूप से कुपोषण की समीक्षा होती रही है और उसमे यूनिसेफ जैसी तकनीकी सहयोगी संस्थाओं को भी हिस्सा बनाया जायेगा ताकि कार्यक्रम संचालन में तकनिकी सहयोग प्राप्त हो सके ।

कुपोषण प्रबंधन हेतु स्वस्थ्य विभाग द्वारा चलये जा रहे कार्यक्रमों जैसे पोषण पुनर्वास केंद्र की सफ़लता के लिए समुदाय स्तर पर इसका प्रचार प्रसार करना आवश्यक है ताकि आम जन तक इसकी पहुँच को बढाया जा सके। इसके अतिरिक्त वहां पर सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ने हेतु राज्य स्तर से मानव संसाधनों की व्यवस्था कि जायेगी उन्होंने कहा। जो पोषण पुनर्वास केंद्र (Nutrition Rehabilitation center) में भर्ती योग्य नहीं हैं परन्तु अति गंभीर कुपोषित हैं, उनके लिए स्वस्थ्य विभाग द्वारा अन्य विभागों के समन्वय से समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन हेतु रणनीति तैयार की जाएगी जिसमे यूनिसेफ का तकनिकी सहयोग अपेक्षित हैं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा की आगे उन्होंने कहा की राज्य को कुपोषण से मुक्त करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और राज्य सरकार एवं स्वस्थ्य विभाग द्वारा हर संभव प्रयास किया जायेगा तथा अगले रास्ट्रीय स्वस्थ्य एवं परिवार सर्वेक्षण में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

एक पहल के रूप में आज राज्य के हर स्थान पर आयरन और फोलिक एसिड की गोली उपलब्ध है जो मातृत्व पोषण को मजबूत करने का पहला कदम है। डॉ संजय कुमार सिंह, अपर कार्यपालक निदेशक ने पोषण पुनर्वास केंद्र कार्यक्रमों के सुद्रढ़ीकरण के बारे में चर्चा करते हुवे पोषण पुनर्वास केन्द्रों पर बेड ऑक्यूपेंसी को बढ़ने हेतु समुदाय में स्क्रीनिंग मैकेनिज्म को विकसित करने की आवशयकता जताई तथा पोषण पुनर्वास केन्द्रों को बच्चा वार्ड के साथ समन्वय करने का सुझाव दिया। कुपोषण के बेहतर प्रबंधन हेतु उन्होंने समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया और यूनिसेफ को इसके लिए पहल करने हेतु आग्रह किया और कहा की इसमें राज्य स्वास्थ्य समिति की और से सभी सुविधाए मुहैया करायी जायेगी।

डा० ए ० के जायसवाल, विभागाध्यक्ष, शिशु रोग विभाग, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने सभी का स्वागत करते हुए कहा की कुपोषण बिहार राज्य के लिए बड़ी गंभीर समस्या ही नहीं वरन अभिशाप है और सभी उपस्थित विशेषज्ञ इस अभिशाप को कम करने के लिए सुझाव दे। डॉ अबनेर डेनिएल, पोषण विशेषज्ञ, यूनिसेफ इंडिया ने कहा की 2025 तक राज्य में कुपोषण दर को कम करने के लिए उन गतिविधियों पर कार्य करना जरुरी है जो अच्छे परिणाम दे उनमें बचाव, पहचान और चिकित्सा तीनो पर कार्य करना होगा। उन्होंने आगे कहा की समुदाय आधारित कुपोषण का प्रबंधन इस दिशा में पुख्ता कार्य हो सकते है। उन्होंने आगे कहा की अति कुपोषित बच्चो की पहचान करने की जरुरत है। उन्होंने यह भी कहा इलाज और बचाव दोनों साथ साथ करने की जरुरत है। यूनिसेफ कुपोषण को समाप्त करने में सहायता करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हम सभी को मिलकर इसे तार्किक निष्कर्ष पर लाना होगा उन्होंने कहा।

डॉ शिवेंद्र पांडेया, कार्यक्रम प्रबंधक, यूनिसेफ बिहारने कहा की बिहार और यूपी जैसे राज्यों को कुपोषण पर ज्यादा ध्यान देने के आवश्यकता है। राष्ट्रिय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 3 से राष्ट्रिय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 4 में कुपोषण की स्थिति में काफी सुधार की है जो की अच्छी बात है। परन्तु इस रफ़्तार को तेज करने की जरुरत है। उन्होंने कहा की इस बाबत राज्य में पोषण की निगरानी और तकनीकी अनुश्रवन के लिए पोषण मिशन बनाने की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने आगे बताया की लगभग दो तिहाई से अधिक बच्चे किसी ना किसी प्रकार से पोषण की कमी से जूझ रहे हैं। जिससे इन बच्चो में मृत्यु का खतरा मंडरा रहा हैं अतएव आवश्यक हैं की बच्चो में मृत्यु दर को रोकने हेतु तथा बच्चो के सही विकास को सुनिश्चित करने हेतु राज्य स्तर पर अभियान चलाया जाए।

कविप्रिया, अनुश्रवण एवं मूल्याङ्कन अधिकारी (Monitoring and evaluation officer) समेकित बाल विकास सेवा, ने आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चो के पोषण को लेकर चलाये जा रहे कार्यक्रम के बारे में बताया। उन्होंने समाज कल्याण विभाग द्वारा कुपोषण प्रबंधन हेतु किये जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला तथा इसके साथ ही उन्होंने समस्याओं जैसे – सरकारी भवन की कमी, उपकरणों की कमी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ में कौशल की कमी तथा इससे सम्बंधित निदान के बारे में बताया ।

रवि० एन० पढ़ी, पोषण विशेषज्ञ, यूनिसेफ बिहार ने कहा की कुपोषण को कम करने के लिए अंतर विभागीय समन्वय की जरुरत के साथ साथ पोषण पुनर्वास केंद्र (Nutrition Rehabilitation center) की गुणवत्ता को बढ़ाने के उपाय किये जाए ताकि यहाँ आने लोग ज्यादा दिन तक रुके ।उन्होंने आगे कहा की पोषण से सम्बद्ध सभी विभागों की एक साथ समीक्षा हो एवं समुदाय स्तर पर पोषण के प्रबंधन के लिए सफल कार्यक्रमों से सीख लेते हुए गतिविधियों का आयोजन किया जाए जिसमे माताओं का क्षमता निर्माण, घरेलु भोजन का संवर्धन शामिल हो। डा० सुरेन्द्र प्रसाद, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, बाल स्वास्थ्य ने पोषण पुनर्वाश केंद्र के अब तक के सफ़र पर प्रस्तुतिकरण दिया जिससे यक स्पष्ट हुआ की अब तक लगभग 40 हज़ार बच्चों ने इसका का लाभ लिया है ।

डा. अमित हर्षाना, चिकित्सा समन्वयक, मेडिसिन सैंस फ्रंटियर नेपिछले कुछ वर्षों में दरभंगा एवं वर्तमान में चक्रधरपुर, झारखण्ड में किये जा रहे समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन के कार्य की सीख को साझा करते हुए बताया की कुपोषण की पहचान के लिए बच्चों की उपरी बाह की मध्य गोलाई के माप के आधार पर अधिकतर बच्चों को समुदाय स्तर पर ही ठीक किया जा सकता है जो बिहार जैसे राज्यों के लिए ज्यादा कारगर होगा ।
डा. प्रवीण, प्रोफेसर, लेडी हार्डिंग कॉलेज, नई दिल्ली ने बिहार में स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र के मुल्यांकन के आधार पर बताया की ट्रेनिंग से लेकर कार्यप्रणाली तक में कई खामियां दिखी जिनको सही करना आवश्यक है ।