बड़गांव के सूर्य मंदिर: यहां नहाने से मिलती है कुष्ठ रोग से मुक्ति

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पटना: नालंदा का प्रसिद्ध ओंगारी और बड़गांव के सूर्य मंदिर देश भर में प्रसिद्ध हैं। माना जाता है कि बड़गांव सूर्यमंदिर की स्थापना दूापर युग में हुई थी। भगवान कृष्ण के पुत्र राजा साम्ब का कुष्ठ रोग यही मिले जलस्रोत के पवित्र जल से ठीक हो गया था। राजा साम्ब ने इस स्थल की खुदाई कराई तो भगवान सूर्य की मूर्ति मिली, जो सात घोड़े के रथ पर सवार, रथ के दोनों तरफ कमल का फूल और बीच में सूर्यदेव के भाई श्यमदित, बांयी ओर कल्पादित ,दाहिनी ओर माता अदिति की प्रतिमाएं मिली जो आज मंदिर में स्थापित है।

इसी वजह से यहां के सूर्य तालाब में स्नान कर मंदिर में पूजा करने से कुष्ठ रोग सहित कई असाध्य व्याधियों से मुक्ति मिलती है। प्रचलित मान्यताओं के कारण यहां छठ व्रत करने बिहार के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि देश भर के श्रद्धालु यहां आते हैं। लोग यहां तम्बू लगा कर सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ संपन्न करते हैं।

कहते है भगवान कृष्ण के वंशज साम्ब कुष्ठ रोग से पीडि़त थे। और भगवान सूर्य की आराधना की थी। तब साम्ब को कुष्ठ से मुक्ति मिली थी। उन्हीं 12 मंदिरों में औंगारी एक है। अन्य सूर्य मंदिरों में देवार्क, लोलार्क, पूण्यार्क, कोणार्क, चाणार्क आदि शामिल है।

उन्नास का सूर्य मंदिर:- उन्नास के सूर्य मंदिर का नाम बहयन्य देव मंदिर है। यह मध्य प्रदेश के उन्नास में स्थित है। इस मंदिर में भगवान सूर्य की पत्थर की मूर्ति है, जो एक ईंट से बने चबूतरे पर स्थित है। जिस पर काले धातु की परत चढ़ी है। साथ ही, साथ 21 कलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सूर्य के 21 त्रिभुजाकार प्रतीक मंदिर पर अवलंबित है।

रनकपुर सूर्य मंदिर:- राजस्थान के रणकपुर नामक स्थान में अवस्थित यह सूर्य मंदिर, नागर शैली में सफेद संगमरमर से बना है। भारतीय वास्तुकला का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता यह सूर्य मंदिर जैनियों के द्वारा बनवाया गया था जो उदयपुर से करीब 98 किलोमीटर दूर स्थित है।

सूर्य मंदिर रांची:- रांची से 39 किलोमीटर की दूरी पर रांची टाटा रोड़ पर स्थित यह सूर्य मंदिर बंडू के समीप है 7 संगमरमर से निर्मित इस मंदिर का निर्माण 18 पहियों और 7 घोड़ों के रथ पर विद्यमान भगवान सूर्य के रूप में किया गया है। 25 जनवरी को हर साल यहां विशेष मेले का आयोजन होता है।

ओंगारी का सूर्यमंदिर- नालंदा जिले में हिलसा अनुमंडल से 17 किमी पर स्थित ओंगारी का सूर्यमंदिर धार्मिक ऐतिहासिक महत्व का स्थल है। इस सूर्यमंदिर को अवनार्क सूर्यमंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

इस सूर्यमंदिर की बनावट से एक खास बात जुड़ी है। सूर्यमंदिर का मुख्यदूार पूर्व दिशा में है लेकिन ओंगारी सूर्यमंदिर का मुख्यदूार पश्चिम दिशा में है। यह चैती छठ के अवसर पर धर्मावलंबी आते है।

मंदिर के मुख्यदूार से एक कहानी जुडी है। मुगल शासन काल के दौरान औरंगजेब का सेनानायक बंगाल जाने के क्रम में यहां आया था। सूर्यदेव की आराधना के लिए जुटी धर्मावलंबियों को चुनौती दे डाली थी। सूर्य में शक्ति है तो मंदिर का रुख बदल जाए और इसके बाद मंदिर का रुख पूर्व से पश्चिम हो गया।

कार्तिक माह में यहां बड़ी संख्या में धर्मावलंबि पूजा-अर्चना व स्नान के लिए आते है। इस अवसर पर यहां तीन दिनों का मेला लगता है।