बदमाशों ने पुनर्वास की जमीन से दलित को भगाया

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सुपौल – किसनपुर थाना क्षेत्र के खखई गांव मे एक दलित परिवार ने बदमाशों के द्वारा कहर ढाने का आरोप लगाया है। एससी/एसटी थाने में मारपीट और पुनर्वास की जमीन से भगा देने के इस आरोप पर एक साल पहले ही मामला भी दर्ज हो चुका है पर कार्रवाई सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गयी है।

ये आरोप लगाते हुए पीड़ित वोकू शर्मा ने अपनी दर्द बयां किया और कहा कि उसका पुराना घर कोशी तटबंध के अंदर है। चूंकि फिर बाढ़ अवधि आ गयी है, ऐसे में सरकार के द्बारा दिए गये पुनर्वास की जमीन पर वे जाना चाहते हैं लेकिन वहां बदमाशों का कब्जा है। लिहाजा कोशी में पानी बढ़ने और बाढ़ आने के बाद वे लोग कहां रहेंगे। ये परेशानी सता रही है।

आरोप है कि पिछले साल इसी तरह पुनर्वास की जमीन पर गया तो बदमाशों ने ना सिर्फ पिटाई की बल्कि पुनर्वास की जमीन पर से भी भगा दिया। जिसके बाद एससी/एसटी थाने में केस किया लेकिन एक साल के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई जिससे वो मर्माहत हैं।

ज्यों-ज्यों बाढ़ का समय आने लगा है पीड़ित परिवार को रहने के लिए घर की चिंता सताने लगी है। खास बात ये भी है कि गांव का कोई अगर पीड़ित परिवार का साथ देता है तो उसे भी बदमाशों का कोप झेलना पड़ता है। आरोप है कि पिछले दिन वार्ड सदस्य मो हमीद ने पीड़ित परिवार की थोड़ी सी मदद की लेकिन उसे भी इसका खमियाजा भुगतना पड़ा। लिहाजा हमीद भी अब इस मामले में कुछ सहयोग करने से डरते हैं।

हालांकि इस बाबत जब हमने एससी/एसटी थानाध्यक्ष से पूछा तो कहा कि पीड़ित का आरोप सत्य है, आरोपी को 41 CRPC के तहत नोटिस देकर बेल बॉन्ड पर छोड़ने का आदेश है। चूंकि मामला जमीनी विवाद का है।

अब सवाल उठता है कि एक तरफ पीड़ित परिवार रहने के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे हैं दूसरी तरफ आरोपी को बेल पर छोड़ने की बात कही जा रही है तो ऐसे मे पीड़ित परिवार को उसकी पुनर्वास की जमीन पर रहने का हक कौन दिलाएगा? खैर जो हो ये तो कानूनी बातें है लेकिन 15 तारीख से कोशी में बाढ़ अवधि की शुरुआत हो गयी है किसी भी वक्त तटबंध के अंदर रह रहे लोगों को पानी बढ़ने के साथ ही घर छोड़कर बाहर निकलना होगा। ऐसे में वोकू शर्मा का पूरा परिवार कहाँ रहेगा ये सोचना भी प्रशासन का दायित्व है।