बयानवीरों के कारण नहीं, समाजवाद की राह पर चल कर ही बिहार में सत्ता तक पहुंची है भाजपाः- प्रो रणबीर नंदन

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पटना जनता दल यूनाइटेड के विधान पार्षद प्रो रणबीर नंदन ने कहा कि बिहार समाजवादी राजनीति की उर्वर भूमि रही है। भारतीय जनता पार्टी अगर आज बिहार की सत्ता तक पहुंच सकी है तो इसके पीछे उसके वो नेता नहीं हैं जो अनर्गल बयान देते रहते हैं बल्कि भाजपा सत्ता तक समाजवादी राह अपना कर पहुंच सकी है। बिहार में बांट कर नहीं, जोड़ने की राजनीति ही जनता को भाती है और यही कारण है कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी का कोई विकल्प नहीं है।

प्रो नंदन ने कहा कि भाजपा के वैसे नेता जो नीतीश कुमार जी के विरोध में वक्तव्य देते हैं उन्हें देश का राजनीतिक इतिहास पढ़ना चाहिए। जिस भाजपा की अजेयता का मुगालता है वो जान लें कि बिना समाजवादियों के भाजपा कभी सत्ता तक नहीं पहुंच सकी। वर्ष 1967 में जब संविद सरकार बनी तो भाजपा भी समाजवादियों के सहारे ही सत्ता तक पहुंची। वर्ष 1977 में जब जनता दल की सरकार बनी तो बीजेपी भी सत्ता में आई। लगभग तीन दशक बाद यानी 2005 में बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनी तो भाजपा सत्ता में आई। वर्ष 2010 में भी नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में ही जदयू के साथ भाजपा सरकार में शामिल रही। 2015 में जब भाजपा को मुगालता हुआ तो भाजपा का सीधे सफाया हो गया था। 2017 में फिर जनता दल यूनाइटेड के साथ आकर ही भाजपा सरकार में शामिल हो सकी।

उन्होंने कहा कि जहां तक बिहार में नेतृत्व का प्रश्न है, तो राजग के किसी भी दल में नीतीश कुमार जैसा न तो कोई चेहरा है और न कोई विजन वाला व्यक्तित्व है। नीतीश कुमार ईमानदारी और विकास के अद्भुत विजन के कारण देश के चेहरा बने हैं, जिसकी भाजपा नेताओं ने पुष्टि करते कहा कि उनमे पीएम मेटेरियल तक कहा है। ऐसे में भाजपा नेताओं को नीतीश कुमार का विरोध करने का नैतिक अधिकार नही है। भाजपा का इतिहास ऐसी गलतियों का रहा है। एक समय भाजपा ने वीपी सिंह की सरकार बनाई और बाद में समर्थन वापस कर सरकार को गिरा भी दी। भाजपा ऐसी गलती नहीं करती तो कांग्रेस की राजनीति उसी वक्त समाप्त हो जाती। इसलिए भाजपा अंधेरे में न रहे और जनता को धकेलने का प्रयास करे। बिहार की जनता की भावना का सम्मान करते हुए गठबंधन की राजनीति को बढ़ने दे।

प्रो नंदन ने कहा कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व को चाहिए कि नीतीश कुमार के विरुद्ध बयान देने वाले नेताओं पर लगाम लगाए जिन्हें न तो राज्य की राजनीति की समझ है और न ही उनका कोई जनाधार है।