बिक गई मोतिहारी की विवादित चीनी मिल की बैरिया फुलवारी

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21 फरवरी की रात में 21 ब्यक्ति को हुई रजिस्ट्री, धनकुबेरों ने खरीदी जमीन, 2 मजदूरों की सहादत गई बेकार। विगत वर्ष में चीनी मिल मजदूरी बकाया राशि के लिए आत्मदाह किया था। बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री सह स्थानीय विधायक कई बार विधानसभा में प्रश्न कर चुके हैं।

मोतिहारी- शहर के लोगों को इस समाचार से बुरी तरह से झटका लगा है। नये साल के शुरुआती दिन जिस मोतिहारी चीनी मिल की बैरिया फुलवारी में वे पिकनिक मनाने जाते थे वह आज बिक गई है। अब लोगों को नए साल में पिकनिक मनाने के लिए नया ठिकाना मेहसी के आसपास की जगह तलाशनी होगी, जहां हजारों एकड़ में लीची के बाग हैं। क्योंकि इस फुलवारी में लगे आम के पेड़ों पर खऱीदारों की कुलहाड़ी चलनी तय है। 

इस फुलवारी की कुल 47 एकड़ जमीन बेचे जाने की सूचना है। बताया जाता है कि मुजफ्फरपुर से लेकर मोतिहारी तक के कारोबारियों ने इस जमीन को खरीदा है। करीब 21 लोगों ने बैरिया फुलवारी की जमीन की 21 फरवरी को रजिस्ट्री करायी। इस रजिस्ट्री को हाईकोर्ट के निर्देश पर कराया जाना बताया जा रहा है। जिस जमीन को खुद सरकार ने बेचे जाने पर रोक लगा दी थी उस मामले में आनन-फानन में जमीन की रजिस्ट्री होना मामले को संदिग्ध बना दिया है।

बताया जाता है कि जमीन की रजिस्ट्री 21 फरवरी की शाम में आरंभ हुई और रात 10 बजे तक यह काम चला, जबकि राजस्व विभाग शाम में ही रजिस्ट्री पर लॉक लगा देता है। पूर्व विधायक ओबैदुल्लाह ने शनिवार को जानकारी देते हुए कहा कि वे इस मामले को सरकार के मुखिया तक ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि किस परिस्थिति में इस जमीन की बिक्री की गई इसका खुलासा वह करवाएंगे। उन्होंने कहा कि अरबों की प्रापर्टी को बेची गई है। किसानों को बकाया राशि नहीं मिला एवं मजदूरों को उनका वेतन भी नहीं दिया जा सका है। दो मजदूरों ने आत्महत्या कर ली थी, लेकिन मिल प्रबंधन की कान पर जूं तक नहीं रेंगी। उन्होंने बताया कि सोमवार को जमीन की रजिस्ट्री किसके नाम से हुई है इसकी जानकारी देंगे। फिलहाल यह मामला राजनीतिक हल्के में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।